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Dehradun News: ‘आर्थिक स्वार्थों को त्याग कर संस्था और समुदाय मिलकर करें काम’

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I- हिमालय दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में बोले हेस्को संस्थापक
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I- आईसीएफआरई में हिमालय में वनों की दशा और दिशा पर विशेषज्ञों ने रखे विचारI

हिमालयी पर्यावरण अध्ययन एवं संरक्षण संगठन (हेस्को) की ओर से हिमालय दिवस के उपलक्ष्य में पांचवें दिन के कार्यक्रम का आयोजन देहरादून में भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) और भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई) में किया गया। हेस्को संस्थापक पद्मभूषण एवं पद्मश्री डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि हिमालय संरक्षण के लिए हम सभी को अपनी प्रकृति की समझ बढ़ानी होगी। आर्थिक स्वार्थों को त्याग कर सभी संस्थाओं और समुदायों को मिलकर काम करना होगा। मौजूदा नीतियां अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही हैं। इसलिए समाज को सरकार पर निर्भर न रहते हुए स्वयं सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

आईसीएफआरई में आयोजित कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘हिमालय में वनों की दशा और दिशा’ रहा। संस्थान के निदेशक विनय कुमार ने हिमालय की विभिन्न नदी घाटियों और क्षेत्रों में पाई जाने वाली सांस्कृतिक धरोहरों और जैव विविधता पर प्रकाश डाला। उन्होंने वनों की कटाई, प्रदूषण और गैर जिम्मेदार पर्यटन जैसी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। आईसीएफआरई की महानिदेशक कंचन देवी ने कहा कि हिमालय न केवल जीवन का आधार हैं बल्कि जीवन का अभिन्न हिस्सा भी है। कहा कि वनों के संरक्षण और संवर्धन के लिए अधिक प्रयास और सामुदायिक सहयोग की आवश्यकता है। पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक और प्रमुख वन बल हिमाचल प्रदेश डॉ. जीएस गोराया ने वनों की स्थिति और उनके सतत प्रबंधन पर व्याख्यान दिए।
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Iहिमालय की नदियां पूरे भारत वर्ष को करती है सिंचितI



भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई) में हिमालय एंड वाइल्ड लाइफ थीम पर आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थान प्रभारी डाॅ. गौरव शर्मा, मुख्य अतिथि एवं हेस्को की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. किरन नेगी, यूकॉस्ट के संयुक्त निदेशक डॉ. डीपी उनियाल, संस्थान वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार मीणा, बोटेनिकटल सर्वे ऑफ इंडियान के डॉॅ. एसके सिंह ने किया। डाॅ. गौरव शर्मा ने हिमालयी क्षेत्र में वास कर रहे तरह-तरह के जीवों के बारे में जानकारी दी। हेस्को वैज्ञानिक डाॅ. किरन नेगी ने कहा कि हिमालय की नदियां केवल हिमालय को नहीं बल्कि पूरे भारतवर्ष को सिंचित करती है। जबकि हिमालय पर कृषि केवल बारिश पर निर्भर है। उन्होंने पहाड़ों पर पलायन की समस्या को भी गंभीरता लेने की बात कही। भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण (एएनएसआई) की प्रभारी डाॅ. अभिशिक्ता घोष राय ने कहा कि हिमालय से जीवन जुड़ा है और हम सभी को मिलकर हिमालय का संरक्षण करना होगा। इस दौरान यूकॉस्ट के संयुक्त निदेशक डॉ. डीपी उनियाल, डॉ. एसके सिंह और डॉ. मनोज कुमार मीणा ने भी विचार रखे।
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