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देहरादून: नरेंद्रनगर वन प्रभाग में कैंपा मद से सबसे अधिक बरसी लक्ष्मी, मिले 104 करोड़, खर्च किए 21 प्रतिशत

Mon, 21 Sep 2026 05:57 PM IST
Renu Saklani विजेंद्र श्रीवास्तव, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

नरेंद्रनगर वन प्रभाग में कैंपा मद से सबसे अधिक लक्ष्मी बरसी। वन प्रभागों को 104 करोड़ मिले।और खर्च सिफ 21 प्रतिशत हुआ।

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money - फोटो : amar ujala
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प्रतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन और योजना प्राधिकरण (कैंपा) से वन प्रभागों को 104 करोड़ रुपये जारी होने के बाद भी खर्च की रफ्तार धीमी है। 31 अगस्त तक जारी बजट का सिर्फ 21 प्रतिशत ही खर्च हो पाया है। सबसे ज्यादा 24 करोड़ 41 लाख रुपये नरेंद्रनगर वन प्रभाग को मिले हैं, लेकिन वहां अब तक सिर्फ दो करोड़ 90 लाख रुपये खर्च हुए हैं।

इस वित्तीय वर्ष में कैंपा के तहत राज्य के लिए 339 करोड़ रुपये का बजट मंजूर हुआ है। इसमें से पहले चरण में 104 करोड़ रुपये जारी किए गए। बजट पाने वालों में नरेंद्रनगर वन प्रभाग सबसे आगे है। इसके बाद देहरादून वन प्रभाग को 23 करोड़ 26 लाख रुपये मिले हैं। गढ़वाल के अन्य वन प्रभागों को एक करोड़ 90 लाख से लेकर करीब नौ करोड़ रुपये तक जारी किए गए हैं। सबसे कम एक करोड़ 90 लाख रुपये भूमि संरक्षण अलकनंदा वन प्रभाग को मिले हैं।

कैचमेंट प्लान के कारण नरेंद्रनगर को ज्यादा बजट

कैंपा अधिकारियों के अनुसार, नरेंद्रनगर वन प्रभाग को अधिक बजट कैचमेंट प्लान के तहत होने वाले कार्यों के लिए दिया गया है। इस योजना में बारिश के पानी के साथ मिट्टी के बहाव को रोकने और मिट्टी को सीधे नदियों व जलाशयों में जाने से रोकने के लिए काम किए जाते हैं।

छह महीने में खर्च करनी होगी पूरी राशि

कैंपा के 104 करोड़ रुपये में से 31 अगस्त तक महज 21 प्रतिशत ही खर्च हुआ है। देहरादून वन प्रभाग ने 11 करोड़ 28 लाख रुपये खर्च किए हैं। वहीं, कई वन प्रभाग ऐसे हैं, जहां जारी बजट का केवल आठ से 12 प्रतिशत ही खर्च हो पाया है। इस बीच केंद्रीय मंत्रालय से 207 करोड़ रुपये और मिल चुके हैं। यह राशि भी वन प्रभागों को जारी की जानी है। ऐसे में अगले छह महीनों में बड़ी रकम खर्च करना विभाग के सामने चुनौती होगी।

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बारिश के समय कार्य करना मुश्किल होता है। बारिश रुकने के बाद कार्याें में तेजी लाई जाएगी। इस संबंध में अधिकारियाें को निर्देश दिया गया है। नरेंद्रनगर को अधिक बजट कैचमेंट प्लान के तहत होने वाले कार्यों के लिए दिया गया है। इसके अलावा कोई अन्य कारण नहीं है। -बीके गांगटे, सीईओ कैंपा

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