चार साल में पूंजीगत व्यय दोगुना
कैग की रिपोर्ट के अनुसार पूंजीगत व्यय में स्थायी बुनियादी ढांचे, सड़क, भवन निर्माण किए जाते हैं। वर्ष 2019-20 में पूंजीगत व्यय 5414 करोड़ था। जो बढ़ कर वर्ष 2023-24 में 10982 करोड़ हो गया। जो एफटीएमपीएस लक्ष्यों से 579 करोड़ अधिक है।
वेतन व मजदूरी भुगतान में 22.43 प्रतिशत की बढ़ोतरी
पांच वर्ष की अवधि में वेतन व मजदूरी में 22.43 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। 2019-20 में 11714 करोड़ की राशि वेतन व मजदूरी पर खर्च का अनुमान था। जो 2023-24 में बढ़ कर 14,341 करोड़ पहुंच गया। इसके अलावा व्यावसायिक व विशिष्ट सेवाओं पर 192.48 करोड़ रुपये व्यय किए गए। वेतन भत्तों व अन्य व्ययों के लिए 1352.41 करोड़ का सहायता अनुदान दिया गया।
गैर प्रतिबद्ध व्यय में बढ़ रही सब्सिडी की प्रवृत्ति
रिपोर्ट में कैग ने सवाल उठाए कि गैर प्रतिबद्ध व्यय में सब्सिडी की प्रवृत्ति बढ़ रही है। 2019-20 में सब्सिडी 35 करोड़ थीं, जो 2023-24 में 428 करोड़ हो गई है। इससे राजस्व व्यय में 0.91 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। खाद्य सब्सिडी पर 76.54 करोड़ व्यय किए जा रहे हैं।