बहन के शोर मचाने पर आसपास के लोग एकत्र हुए और दरवाजे की कुंडी तोड़कर किशोरी को छुड़ाया। इसी दौरान लड़की के परिजन भी घर पहुंच गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने लड़के को हिरासत में ले लिया। थाना प्रभारी बीडी जोशी ने बताया कि सोमवार को युवक को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है।
पुलिस के अनुसार कुछ समय पूर्व युवक के परिजनों ने उसे पढ़ाई के लिए एक कोचिंग सेंटर में भेजा था। वहां युवक ने कोचिंग कराने वाली अपनी शिक्षिका के साथ ही अश्लील हरकतें कर दी थीं, जिससे उसे वहां से निकाल दिया गया था और इसके बाद युवक पढ़ाई भी नहीं की पाया। ब्यूरो
दून महिला अस्पताल में एक नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता ने बेटे को जन्म दिया है। जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। रविवार शाम कैंट क्षेत्र निवासी एक नाबालिग को प्रसव पीड़ा के चलते परिजनों ने दून महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। देर रात उसने बेटे को जन्म दिया।
नाबालिग ने अस्पताल के स्टाफ को बताया कि कुछ समय पहले उसकी जान पहचान एक सैन्य कर्मचारी से हुई थी। इसी बीच दोनों में प्रेम-प्रसंग हो गया। आरोप है उसने नाबालिग से शादी भी की। लेकिन, कुछ दिन बाद उसने नाबालिग को छोड़ दिया। नाबालिग के अनुसार इस संबंध में उनका कोर्ट में केस चल रहा है।
अदालत ने पांच साल की बच्ची से दुष्कर्म के दोषी नाबालिग को सात साल के कारावास और एक हजार रुपये के आर्थिक दंड की सजा सुनाई है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान बयान बदलने वाले बच्ची के पिता के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
देहरादून में शर्मसार करने वाली यह घटना 25 नवंबर 2017 की है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक अभियुक्त ने पड़ोस में रहने वाले नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया था। पुलिस ने मेडिकल और डीएनए कराने के अलावा भी आरोपी के खिलाफ काफी साक्ष्य जुटाए थे। पुलिस के आरोपपत्र दाखिल करने के बाद इस मामले की सुनवाई पॉक्सो कोर्ट की न्यायाधीश रमा पांडेय की अदालत में हुई।
जिला सहायक शासकीय अधिवक्ता भरत सिंह नेगी ने बताया कि अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी मानते हुए सात साल के कारावास की सजा सुनाई है। एक हजार रुपये का जुर्माना नहीं देने की स्थिति में उसे एक सप्ताह का अतिरिक्त कारावास भुगतान होगा।
बालिग होने के बाद उसे जेल में स्थानांतरित किया जाएगा। फिलहाल वह बाल सुधार गृह हरिद्वार में बंद है। सरकारी अधिवक्ता नेगी के मुताबिक सुनवाई के दौरान पीड़ित बच्ची के पिता ने अपना बयान बदल लिया था। अदालत ने पक्षद्रोही होने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए एसएसपी को पीड़ित बच्ची के पिता के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश भी दिए हैं।