एसपी सिटी ने बताया कि दोनों भाइयों की गांव में करीब 24 बीघा पैतृक भूमि है और आर्थिक स्थिति ठीक न होने के चलते लोकेंद्र अपना हिस्सा बेचना चाहता था। योगेंद्र उसे हिस्सा नहीं बेचने दे रहा था और पिता भी भूमि बेचने के खिलाफ थे। एसपी सिटी ने बताया कि रुड़की की एक औद्योगिक इकाई में कार्यरत लोकेंद्र ने करीब पंद्रह दिन पूर्व हत्या की योजना बना ली थी। चार नवंबर को रुड़की से चाकू खरीदा। फिर उसने छोटे भाई को लड़की दिखाने के बहाने से यहां बुलाकर सुनसान स्थान पर पहुंचते ही पेट पर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर हत्या कर दी और फरार हो गया। बताया कि सबसे छोटा भाई रविंद्र फरीदाबाद हरियाणा में नौकरी कर रहा है।
छोटे भाई का कत्ल करने के बाद अब पछता रहे बड़े भाई ने रैकी कर हत्याकांड को अंजाम दिया। वह दो बार यहां आकर सुनसान स्थान की लोकेशन देखकर भी गया था। फिर अपनी योजना के तहत ही उसने छोटे भाई को यहां लाकर उसकी हत्या कर दी और सीधे रुड़की में अपने कमरे पर पहुंचा। कुछ दिन बाद वह सहारनपुर गया था, जब परिजन ने उसे जानकारी दी थी कि योगेंद्र घर नहीं आया है।
भाई की शिनाख्त के लिए आना हत्यारोपी भाई के लिए गले की फांस बन गया था। दरअसल, स्थानीय पुलिस ने मृतक की शिनाख्त के लिए पंपलेट वितरित किए थे। सोशल मीडिया का भी सहारा लिया था। तभी किसी परिचित ने पंपलेट देखकर लोकेंद्र को सूचना दी। इसी कारण लोकेंद्र को भाई की पहचान करने के लिए आना पड़ा, वरना वह कभी भी यहां न आता।
इस तरह सुलझी गुत्थी
योगेंद्र हत्याकांड में मृतक के मोबाइल फोन के कॉल डिटेल रिकार्ड से ही कामयाबी मिली है। चार नवंबर को मृतक की केवल अपने ही भाई से बातचीत हुई थी, उसके अलावा किसी दूसरे शख्स से बात ही नहीं हुई थी। दूसरी बात ये निकलकर आई कि घटना वाले दिन हत्यारोपी की लोकेशन भी बहादराबाद क्षेत्र में ही थी। इसलिए हत्याकांड की गुत्थी सुलझती चली गई।