पासपोर्ट बनवाने के लिए रिश्वत मांगने के आरोपी दलाल को सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने दोषी करार देते हुए चार साल कठोर कारावास की सजा सुनाई है। सीबीआई स्पेशल जज सुजाता सिंह की अदालत ने दोषी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने पक्षद्रोही हुए एक गवाह के खिलाफ भी कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
सीबीआई के अधिवक्ता अभिषेक अरोड़ा ने बताया कि नवीन चंद ने 19 जून 2013 को पासपोर्ट कार्यालय में आवेदन किया था। इसके लिए उन्हें 20 जुलाई 2013 को इंटरव्यू की तिथि दी गई थी। इसी दौरान उनकी मुलाकात पासपोर्ट कार्यालय परिसर में कैंटीन में काम करने वाले जिशांत से हुई।
जिशांत ने उनसे कहा कि यदि वे कुछ खर्च करेंगे तो उनका इंटरव्यू जल्द करा दिया जाएगा। इसके लिए उसने दो हजार रुपये की मांग की और 28 जून 2013 को अपने पास बुलाया। इस दौरान नवीन चंद ने सीबीआई को इस मामले की शिकायत कर दी।
सीबीआई ने प्राथमिक जांच के बाद ही जिशांत के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया और अगले दिन 28 जून 2013 को उसे दो हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। सीबीआई अधिवक्ता अभिषेक अरोड़ा ने बताया कि इस मुकदमे में कुल 19 गवाह प्रस्तुत किए गए थे।
जबकि, बचाव पक्ष की ओर से केवल एक ही गवाह पेश किया गया। मुकदमे में कैंटीन का मालिक जिसने सीआरपीसी 164 के बयानों में जिशांत के खिलाफ गवाही दी थी वह पक्षद्रोही हो गया। सीबीआई ने उसके खिलाफ सीआरपीसी 193 के तहत कार्रवाई करने के आदेश सीबीआई को दिए हैं।