बताया जाता है कि एक बार शंकर ने ससुराल छोड़ने की भी सोची लेकिन तब उसकी पत्नी अन्नू दीवार बनकर खड़ी हो गई। वह अपनी पत्नी का विरोध नहीं कर सका और ससुराल में ही जिंदगी गुजर बसर करने का फैसला किया।
बकौल हरिद्वार कोतवाली प्रभारी निरीक्षक प्रवीण कोश्यारी लक्ष्मी देवी अब दामाद शंकर की मौजूदगी में ही जिस्मफरोशी के धंधे से जुड़ी बातें करने लग गई थी। वह जब भी समझाने की कोशिश करता था तब उसे डांट देती थीं।
आसपास के लोग और रिश्तेदार भी अक्सर उसे बोलते थे कि लक्ष्मी देवी उसकी पत्नी को भी इस गलत धंधे में धकेल सकती है। जब वह गंगा घाट पर दूध बेचने के लिए जाता तब उसकी सास और पत्नी घर से गायब हो जाते थे। इससे उसका शक बढ़ गया और सास के प्रति नफरत बढ़ती गई।
पुलिस को देना चाह था गच्चा
बेहद सीधे से दिखने वाले शंकर गिरी ने सास का कत्ल करने के बाद पुलिस को गच्चा देने की पटकथा भी लिखी थी। जब शंकर ने हत्या कर दी तब उसने सास के घर के बगल में रहने वाले दर्जी राधेश्याम के मोबाइल फोन पर संपर्क साधा। फोन राधेश्याम के बेटे ने उठाया। तब उसने दर्जी के बेटे से कहा था कि उसके पिता भी क्या गंगा घाट पर दूध बेचने चल रहे हैं क्योंकि वह जा रहा है। यह सब उसने इसलिए किया था कि वह पुलिस को गच्चा देना चाह रहा था कि वह तो अपने काम में गया था, लेकिन ऐसा हो नहीं सका।
बेटी की भूमिका की जांच जारी
लक्ष्मी हत्याकांड में स्थानीय पुलिस की जांच के दायरे में बेटी अन्नू भी है। एसएसपी जन्मेजय प्रभाकर खंडूड़ी की मानें तो बेटी की भूमिका प्रथम दृष्टया अभी प्रकाश में नहीं आई है लेकिन अभी जांच चल रही है। जांच के दौरान जो तथ्य सामने आएंगे, उसी के अनुसार ही कार्रवाई होगी।