प्रकाश और संजय की मौत से उनका परिवार पूरी तरह टूट गया है। दोनों भाई आजीविका के लिए घर से बाहर निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। दोनों भाई पर परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी थी। उनकी मौत के बाद से परिवार की आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। उनके बच्चों के भविष्य पर भी अनिश्चितता के काले बादल मंडराने लगे हैं। डिरनाड निवासी केवलराम के दो बेटे थे। प्रकाश बड़ा था और संजय उससे छोटा था। दोनों ही राज मिस्त्री का कार्य करते थे। लोग मकानों की छतों की मरम्मत के लिए दोनों को विशेष तौर पर बुलाते थे। इसी काम के सिलसिले में दोनों भूठ गांव गए थे। यहीं रहकर काम कर रहे थे। दोनों भाई विवाहित थे। प्रकाश के दो बेटे और संजय का एक बेटा और बेटी है। चारों ही बच्चे छोटे हैं। दोनों की मौत के बाद परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी केवलराम के बूढ़े कंधों पर आ गई है। संवाद