दीन दयाल पार्क के सामने बनी 102 साल पुरानी महात्मा खुशीराम लाइब्रेरी में पिछले छह साल से किताबें नहीं आ रही हैं। ऐसे में यहां पाठकों की संख्या लगातार कम हो रही है। वहीं, कुछ पाठक अपनी किताबें लेकर पढ़ने आ रहे हैं। लाइब्रेरी में साहित्य, धर्म, दर्शनशास्त्र की पुरानी किताबें हैं। मासिक पत्रिका, अखबार और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें नहीं आ रही हैं।
महात्मा खुशीराम लाइब्रेरी की हालत आज ठीक नहीं है। लाइब्रेरी टूटने की कगार पर है। हालांकि, स्मार्ट सिटी की ओर से कुछ समय पहले लाइब्रेरी की रंगाई-पुताई कराई है। नई किताबें न आने की वजह से यहां पर पाठकों का आना कम हो गया है। कई पाठक अपनी किताबें लाकर यहां पर पढ़ने सिर्फ इसलिए आते हैं क्योंकि शांतिपूर्ण वातावरण रहता है। कुछ पाठक ऐसे हैं जो पिछले 10 साल से यहां पर आते हैं। पाठकों ने बताया कि एक समय ऐसा था जब सालाना 150 से अधिक किताबें आती थीं। लेकिन आज स्थिति अच्छी नहीं है। नई किताबें नहीं आने से निराशा होती है।
Iप्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में परेशानीI
पाठकों ने बताया कि लाइब्रेरी की प्रतिमाह 100 रुपये फीस है। लाइब्रेरी सुबह नौ बजे खुलने के बाद शाम छह बजे बंद होती है। लाइब्रेरी में सोमवार को अवकाश रहता है, बाकी दिन खुली रहती है। यहां पर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र अपनी किताबें लेकर आते रहते हैं। सुबह से शाम तक रोजाना 70 से 80 लोग आते हैं। जबकि पहले 150 से अधिक लोग आते थे।
Iलेखक प्रचार-प्रचार के लिए दान कर जाते हैं किताबेंI
लाइब्रेरी इंचार्ज पितांबर जोशी का कहना है कि किताबें कोलकाता के राजा राम मोहन रॉय पुस्तकालय और शिक्षा विभाग की ओर से आती थीं। लेकिन 2016 के बाद से किताबें आना बंद हो गई हैं। अब यहां पर लेखक अपनी पुस्तकों का प्रचार करने के लिए पुस्तकें दान करते हैं।