किशोर न्याय बोर्ड में अभियोजन पक्ष ने मुकदमे की विवेचना अधिकारी और बाल कल्याण समिति की अध्यक्षा समेत कुल नौ गवाह पेश किए थे। बचाव पक्ष के अधिवक्ता सौरभ दुसेजा ने बताया कि अभियोजन के किसी भी गवाह के बयान घटनाक्रम से मेल नहीं खा सके। लिहाजा, यशदीप राउते की अध्यक्षता वाले बोर्ड ने सोमवार को तीनों आरोपियों को बरी कर दिया।
रिपोर्ट में सिर्फ छेड़छाड़ की बात
इस मामले में बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष की गोपनीय रिपोर्ट भी अभियोजन के आरोपों को बल नहीं दे सकी। रिपोर्ट में कहीं भी दुष्कर्म का जिक्र नहीं था। इसमें केवल छेड़छाड़ की बात लिखी गई थी। ऐसे में यह बात सिद्ध नहीं हो सकी कि 14 अगस्त को छात्रा से दुष्कर्म हुआ था।
एसओ और पीड़िता की बहन को नहीं बनाया गवाह
किशोर न्याय बोर्ड में चल रहे इस मामले में तत्कालीन एसओ सहसपुर नरेश राठौर को गवाह नहीं बनाया गया था। जबकि, नरेश राठौर ने ही 16 सितंबर को पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया था। यही नहीं न पीड़िता की बहन और न ही उसकी सहेली को गवाह बनाया गया।