- सहसपुर में पिंक शौचालय नहीं, महिलाओं को होती है अधिक परेशानी
ब्लॉक मुख्यालय सहसपुर पिंक शौचालय की सोच से कोसों दूर है। प्रशिक्षु आईएएस और तत्कालीन बीडीओ वरुणा अग्रवाल ने महिलाओं और आम लोगों की परेशानी को समझते हुए मुख्य बाजार में कई वर्षों से बंद पड़े सार्वजनिक शौचालय को खुलवाया था, लेकिन उनके जाने के बाद करीब दो माह से सार्वजनिक शौचालय में ताले पड़े है। बाहर इतनी गंदगी और दुर्गंध है कि लोग शौचालय की तरफ जाने से बचते हैं।
सहसपुर और आसपास की आबादी करीब 30 हजार है। मुख्य बाजार में ब्लॉक कार्यालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, थाना, प्रमुख बैंक आदि है। शौचालय के बंद होने से मुख्य बाजार में आने वाली महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। यह हाल तब है जब ब्लॉक की कमान भी एक महिला जनप्रतिनिधि के हाथ में है।
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Iबाजार में एक शौचालय है वो भी अधिकांश बंद रहता है। अगर खुला भी मिले तो पुरुषों और महिलाओं के लिए एक ही जगह पर शौचालय का प्रयोग करना अव्यवहारिक है। महिलाओं के लिए पिंक शौचालय का निर्माण होना चाहिए। - अनु, सहसपुरI
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Iबाजार में एकमात्र शौचालय में हमेशा ताला लगा रहता है। महिला और पुरुषों के लिए नए सार्वजनिक शौचालय का निर्माण होना चाहिए। महिलाओं को पुरुषों के समान सुविधाओं का लाभ मिले, तब ही बराबरी का अधिकार मिलेगा। - आशा, सहसपुर
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Iमुख्य बाजार में शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं है। महिलाओं के लिए यह सबसे खराब स्थिति होती है। अगर इमरजेंसी में शौचालय का प्रयोग करना हो तो कहां पर जाए। महिला शौचालय तो बनने ही चाहिए। - गीता मौर्य, सहसपुर
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Iसार्वजनिक शौचालय के निर्माण में कोई समस्या नहीं है। जमीन देने के लिए कोई ग्राम पंचायत आगे नहीं आती है। संचालन के लिए भी व्यापारिक और सामाजिक संगठनों को मदद करनी चाहिए। शौचालय निर्माण में नहीं उसके रखरखाव में समस्या आती है। - सीमा नेगी, ब्लॉक प्रमुखI