बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर एग्जिट पोल के नतीजों के विपरीत आए रुझानों से उत्तराखंड की विपक्षी पार्टियां भी हैरान हैं। तकरीबन सभी एजेंसियों के एग्जिट पोल एनडीए को जादुई आंकड़े से काफी अलग बता रहे थे। अब बिहार में सरकार चाहे जिसकी बनें, लेकिन उत्तराखंड की सियासत में एक बार फिर इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन चर्चा में है।
चुनाव नतीजों के रुझान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह के गले नहीं उतर रहे हैं। वह कहते हैं, विधानसभा चुनाव में हमने टीवी पर देखा कि महागठबंधन की रैलियों में भीड़ उमड़ रही थी। इसके विपरीत पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा नेताओं की रैलियों से भीड़ गायब थी। एग्जिट पोल ने भी नतीजे दिए थे लेकिन रुझान इससे बेहद भिन्न हैं। इसलिए हमें संदेह तो है।
भाजपा नेता अमित शाह ने जिस अति आत्मविश्वास के साथ बिहार और पश्चिमी बंगाल के चुनाव में बहुमत लेने का दावा ठोका, हमें उस पर संदेह है। इतना आत्मविश्वास कैसे है? स्वस्थ लोकतंत्र के लिए सबका विश्वास जरूरी है। आखिर क्या बात है कि बार-बार ईवीएम को लेकर बात उठती है। सरकार चुनाव बैलेट से क्यों नहीं करा देती। हमारी भी गलतफहमी दूर हो जाएगी। हमें कहने का मौका नहीं मिलेगा।
उधर भाजपा इसे कांग्रेस की पीड़ा करार देती है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बंशीधर भगत कहते हैं, चुनाव हारने के बाद कांग्रेस के पास ईवीएम का पुराना बहाना है। वह चुनाव में मात खाती है और फिर ईवीएम को लेकर मातम मनाती है। दिक्कत ईवीएम में नहीं कांग्रेस की मानसिकता में है। उसे विचार करना चाहिए कि उत्तराखंड से लेकर बिहार तक आखिर उसकी बुरी गत क्यों हो रही है।
जनादेश का सभी राजनीतिक दलों को सम्मान करना चाहिए। जोड़ तोड़ की राजनीति सरकार बनाने के लिए बिल्कुल न करें।
- दिनेश मोहनिया, प्रदेश प्रभारी, आम आदमी पार्टी