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विरासत में भाग्येश मराठे ने शास्त्रीय संगीत से मोह मन

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विरासत में प्रस्तुति देते भाग्येश मराठे। संवाद - फोटो : DEHRADUN
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विरासत आर्ट एंड हेरिटेज फेस्टिवल के 11वें दिन विरासत साधना कार्यक्रम में भाग्येश मराठे ने शास्त्रीय संगीत की मनमोहक प्रस्तुति से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। इससे पहले बुधवार को विभिन्न स्कूलों के बच्चों ने पेंटिंग प्रतियोगिता में अपना हुनर दिखाया। सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम में भाग्येश मराठे ने विलाम्बित बंदिश ‘‘रसिया हो, ना जाओ‘‘ और द्रुत बंदिश ‘‘बावरी भाई बिरहान.. की सुंदर प्रस्तुति दी।
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भाग्येश मराठे, एक संगीत परिवार में पैदा हुए। वे महान भारतीय शास्त्रीय गायक संगीत भूषण पंडित राम मराठे के पोते हैं। उनका प्रदर्शन राग की उनकी विपुल समझ को दर्शाता है। जिससे संगीत प्रस्तुति की एक अनूठी शैली विकसित होती है। उन्होंने चार साल की उम्र में तबला सीखना शुरू कर दिया था और लगभग 15 वर्षों तक श्री प्रभु घाटे, उनके चाचा श्री मुकुंद मराठे, पं मुकुंदराज देव और श्री गजानन राउल (उस्ताद अल्लार्खा खान साहब के शिष्य) थे।
सांस्कृतिक कार्यक्रम के अन्य प्रस्तुतियों में इंडियन ओसियन बैंड ने अपनी प्रस्तुति दी। इंडियन ओसियन ने पिछले 33 वर्षों में समाज के लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए नाम बनाया है। उन्होंने अपनी आने वाली एलबम के कुछ गाने गाए। पीयूष मिश्रा की लिखित आगामी फिल्म ‘चक्की’ का उनका गाना, ‘सरपत आया कैसा खोखला जमाना रे ..’ लोगों के बीच बहुत हिट था।
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