सुसवा नदी श्रेणी और अन्य भूमिधरी की भूमि का सीमांकन स्पष्ट नहीं होने से प्रशासन ने 346 हेक्टेयर भूमि की खरीद-फरोख्त पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी है। तहसीलदार की जांच रिपोर्ट के बाद एसडीएम ने यह रोक लगाते हुए डीएम को रिपोर्ट भेज दी है। आशंका जताई जा रही है सुसवा नदी श्रेणी की भूमि पर फर्जीवाड़ा किया गया है। फिलहाल प्रशासन के स्तर पर इसकी गहनता से जांच शुरू कर दी है।
28 जुलाई को महिपाल सिंह भंडारी और अन्य लोगों ने एसडीएम को शिकायती पत्र दिया था। कहा था कि उन्होंने मारखम ग्रांट द्वितीय में चार-पांच साल पहले जमीन खरीदी थी। संबंधित भूमि के विक्रय पत्र में जो खसरा नंबर दर्ज है वह मौके पर लिए गए कब्जे के खसरा नंबर से अलग है। जिसके कारण बैंक से लोन नहीं मिल पा रहा है। एसडीएम शैलेन्द्र सिंह नेगी ने तहसीलदार डोईवाला को जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे। जांच की गई तो पाया गया कि ग्राम मारखम ग्रांट द्वितीय के खाता संख्या 1122 में बहुत से खसरा संख्या शामिल है। जिसका कुल रकबा 346 हेक्टेयर से अधिक है।
खतौनी में पहले यह भूमि नदी श्रेणी में दर्ज थी। बाद में न्यायालयों के पारित आदेशों के बाद कुछ भूमि को भूमिधरी घोषित किया गया। जबकि कुछ भूमि अभी भी नदी श्रेणी में शामिल है। नदी श्रेणी की भूमि और अन्य भूमिधरी भूमि में सीमांकन नहीं होने से कब्जा स्पष्ट नहीं हो रहा है। जिसको लेकर अग्रिम आदेशों तक भूमि के क्रय और विक्रय के अलावा खुर्द-बुर्द होने से रोकने के लिए तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की रिपोर्ट दी गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर उपजिलाधिकारी की ओर से भूमि के क्रय-विक्रय पर रोक लगा दी गई है।
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शिकायत मिलने पर तहसीलदार डोईवाला ने जांच कर आख्या मांगी गई। जिसके आधार पर मारखम ग्रांट द्वितीय के खाता संख्या 1122 की भूमि के क्रय-विक्रय पर रोक लगाई है। यह 346 हेक्टेयर से अधिक भूमि है। डीएम को मामले से अवगत करा दिया है। आगे की कार्रवाई के लिए निर्देश लिए जा रहे है। - शैलेन्द्र सिंह नेगी, एसडीएम, डोईवाला