आठ-आठ लाख रुपये में बीएएमएस की फर्जी डिग्रियां खरीदकर क्लीनिक चला रहे दो डॉक्टरों को एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों ने बाकायदा भारतीय चिकित्सा परिषद में रजिस्ट्रेशन भी कराया था। कर्नाटक के एक विश्वविद्यालय की डिग्री उन्होंने मुजफ्फरनगर के एक दलाल से खरीदी थी। एसटीएफ ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया। दलाल अपने भाई के साथ मुजफ्फरनगर में एक कॉलेज चलाता है। तीनों आरोपियों को न्यायालय के आदेश पर जेल भेज दिया गया है।
एसटीएफ के एसएसपी आयुष अग्रवाल ने बताया कि बीते एक माह से शिकायत मिल रही थी कि देहरादून में कुछ आयुर्वेदिक डॉक्टर फर्जी डिग्री के आधार पर प्रैक्टिस कर रहे हैं। इन्होंने भारतीय चिकित्सा परिषद (आईएमसी) में पंजीकरण भी करा लिया है। शुरुआती जांच में ही ऐसे 36 डॉक्टरों के बारे में जानकारी मिली। पता चला कि उन्होंने राजीव गांधी हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी कर्नाटक से डिग्रियां हासिल की हैं। ये डिग्रियां पूरी तरह से फर्जी हैं। इन्हें बाबा ग्रुप ऑफ कॉलेज, मुजफ्फरनगर के मालिक इमरान और इमलाख ने तैयार किया है।
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प्राथमिक जांच के बाद एसटीएफ ने प्रेमनगर में क्लीनिक चला रहे प्रीतम सिंह निवासी श्यामपुर, प्रेमनगर और रायपुर में क्लीनिक चला रहे मनीष अली उर्फ मुनीस निवासी अधोईवाला, रायपुर को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में इन्होंने बताया कि ये डिग्रियां आठ-आठ लाख रुपये में इमरान और इमलाख से खरीदी थीं। पुष्टि होने पर एसटीएफ की दूसरी टीम ने मुजफ्फरनगर में छापा मारा और इमरान निवासी शेरपुर को गिरफ्तार कर लिया। पता चला कि यह काम वे लंबे समय से कर रहे हैं।