कपाट बंद होने की इस अंतिम प्रक्रिया के बाद रावल उल्टे पांव मंदिर से बाहर आ जाते हैं। बदरीनाथ धाम के पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल बताते हैं कि जब रावल स्त्री वेश में माता लक्ष्मी को गर्भगृह में विराजमान करते हैं तो वे भावुक हो जाते हैं। परंपरा के अनुसार वह किसी को चेहरा दिखाए बिना मंदिर के कर्मचारियों की उपस्थिति में सीधे अपने आवास पर चले जाते हैं।
फूलों से सजकर भक्तों को देते हैं दर्शन
बदरीनाथ मंदिर के कपाट खुलने के बाद हर दिन सुबह अभिषेक के बाद भगवान का आभूषणों से शृंगार किया जाता है लेकिन कपाट बंद होने के दिन भगवान का शृंगार फूलों से किया जाता है। भगवान पुष्प रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। पूरे साल यही एक दिन होता है जब भगवान फूलों से सजकर भक्तों को दर्शन देते हैं।