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Dehradun News: मक्के की फसल बर्बाद कर रहा पतझड़ सैनिक कीट

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कीट के प्रकोप से पत्तियों को पहुंच रहा नुकसान
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इन दिनों क्षेत्र में मक्के की फसल पर पतझड़ सैनिक कीट (फॉल आर्मी वर्म कीट) का प्रकोप दिखाई दे रहा है। जिससे पत्तियां नष्ट हो रही है। जिसके देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने कीट प्रबंधन की सलाह दी है। मक्का गेंहू और धान के बाद सबसे ज्यादा उगायी जाने वाले फसल है। देहरादून के मैदान और पर्वतीय क्षेत्रों में करीब 14420 हेक्टेयर क्षेत्रफल में मक्का की खेती की जाती है। मक्के की पहली बुआई मार्च और अप्रैल, जबकि दूसरी फसल 15 जून के बाद 15 जुलाई तक की जाती है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक पौध सुरक्षा डॉ. एमपी सिंह ने बताया कि इन दिनों मक्के की फसल में पतझड़ सैनिक कीट का प्रकोप देखा जा रहा है। यह एक बहुत विनाशकारी कीट है। इसके प्रकोप से कभी पूरी की पूरी फसल नष्ट हो जाती है। उन्होंने बताया कि मादा कीट पत्तियों की निचली सतह पर बड़ी संख्या में अंडे देता है। अंडे से सुंडी निकलती है। जिसका जीवन काल 14 दिन का होता है। इस कीट की सुंडी मुख्य रूप से पौधे के तने और पत्ती को खाती है। प्रारंभिक अवस्था में पत्तों पर छोटे छोटे छिद्र नजर आते हैं। बाद में पत्तियां कटी फटी दिखाई देती हैं। गंभीर अवस्था में पत्तियों ऊपरी भाग क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।





इस तरह करें कीट प्रबंधन



कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक पौध सुरक्षा डॉ. एमपी सिंह ने बताया कि इस समय कीट का नियंत्रण करना जरूरी होता है। इस कीट से बचाव के लिए बुआई के समय गहरी जुताई करनी चाहिए। जिससे कीट की प्यूपा अवस्था नष्ट हो जाती है। मक्के के खेत के चारों तरफ ट्रेप क्राप (जाल फसल) के रूप में नैपियर घास की तीन से चार पक्तियां लगानी चाहिए। अंतरवर्ती फसल जैसे अरहर, लोबिया, उरद, राजमा, मूंग आदि की दो लाइन के साथ एक लाइन में मक्का लगाना चाहिए। पौध में जब छह से सात पत्तियों की अवस्था हो तब नीम आधारित कीटनाशक पांच प्रतिशत नीम की निंबोली या एजाडिरौक्टिन की पांच एमएल मात्र प्रति लीटर की दर से छिड़काव करें। यदि प्रकोप ज्यादा हो तो क्लोरैनट्रानीलीप्रोले 18.5 एससी (कोराजन) 4 मिली प्रति 10 लीटर पानी में अथवा स्पाइनेटोरम 11.7 प्रतिशत एससी (लरगाे) की 5 एमएल प्रति 10 लीटर में घोल बनाकर छिड़काव करें।
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बुआई से पूर्व करें बीज का उपचार

कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक पौध सुरक्षा डॉ. एमपी सिंह ने बताया कि बुआई से पूर्व बीज को थियो-मेथो-क्जाम 30 एफएस (क्रूजर)_छह ग्राम प्रति किग्रा बीज की दर से उपचारित करना चाहिए।
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