किराये के भवन में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों का पिछले 10 महीने से किराया नहीं आ रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को किराया स्वयं देना पड़ रहा है। भवन मालिक किराया न देने की स्थिति में भवन खाली करवाने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर दबाव बना रहे हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है, कम सैलरी में भी हर महीने आंगनबाड़ी भवन का किराया भी अपनी जेब से देना पड़ रहा है।
उत्तराखंड राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की प्रदेश अध्यक्ष सुशीला खत्री ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र पर बच्चों की पढ़ाई का काम रुक गया है। किराये पर चल रहे आंगनबाड़ी केंद्र खाली करवाने का काम भवन मालिकों ने शुरू कर दिया है। मई 2023 से आंगनबाड़ी केंद्रों का किराया नहीं आया है। ऐसे में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को रोजाना भवन मालिकों की धमकियां मिल रही हैं। किराया न आने की वजह से बच्चों को पढ़ाना मुश्किल हो गया है।
जिले में सात परियोजनाएं संचालित
जिला कार्यक्रम अधिकारी जितेंद्र कुमार ने बताया कि जिले में सात आंगनबाड़ी परियोजनाएं चलती हैं। इनमें एक शहरी और छह ग्रामीण परियोजना हैं। इन सभी परियोजनाओं में कुल 1907 आंगनबाड़ी केंद्र चलते हैं। जल्द ही इन केंद्रों का किराया आ जाएगा।
Iआंगनबाड़ी केंद्र मानक के अनुरूप नहींI
मानक के अनुरूप आंगनबाड़ी केंद्र में 500 से 600 वर्ग फीट की जगह होनी चाहिए। आंगनबाड़ी केंद्र में शौचालय, स्वच्छ पेयजल, विद्युत कनेक्शन और सभी मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था हो। किराये पर चल रहे आंगनबाड़ी केंद्र एक छोटे से कमरे में संचालित होते हैं। उस कमरे की चहारदीवारी के अंदर ही आंगनबाड़ी केंद्र चलता है।