आफत की बारिश के बीच जौनसार क्षेत्र में कई गांवों में भू-धंसाव के चलते मकान क्षतिग्रस्त हो गए। तब प्रशासन की टीम ने गांवों में मकानों में हुए नुकसान का जायजा लेकर प्रभावितों को जल्द मुआवजा देने का भरोसा भी दिया, लेकिन दो महीने बीतने के बाद भी अब तक कई आपदा पीड़ितों को मुआवजा नहीं मिला है। वहीं कुछ लोगों के मकानों में आंशिक नुकसान दिखाकर उनको 11 हजार रुपये का मुआवजा देकर इतिश्री कर दी गई है।
मौजूदा हाल यह है कि आपदा पीड़ितों के घर बिल्कुल भी रहने लायक नहीं है। मजबूरी में आपदा पीड़ित किराए मकान में रह रहे हैं, जिसके लिए उनको दो से तीन हजार रुपये महीना देना पड़ रहा है। आपदा पीड़ित अपने आशियानों के उजड़ने, मुआवजा न मिलने और आंशिक मदद के नाम पर हुए मजाक के तिहरे दर्द से गुजर रहे हैं। पाटन और खमरौली में ऐसी ही तीन परिवार हैं, जो आपदा के बाद अब भी सरकारी मरहम का इंतजार कर रहे हैं। संवाद
Iकेस 1I
19 जुलाई को भू-धंसाव के चलते 200 मीटर सड़क के साथ मेरा पूरा मकान बैठ गया था। मकान कभी भी पूरी तरह से जमीनदोंज हो सकता है। प्रशासन की टीम ने निरीक्षण के दौरान मकान को पूरी तरह से असुरक्षित मानते हुए शिफ्ट होने के लिए कह दिया था। पिछले दो महीने से किराये के मकान में रह रहे हैं। अब तक मुआवजा नहीं मिला है। प्रीतम, आपदा प्रभावित, पाटन
Iकेस 2I
दो महीने पहले भू-धंसाव की चपेट में आकर मकान क्षतिग्रस्त हो गया था। मकान का आंगन भू-धंसाव की भेंट चढ़ गया, घर का पूरा फर्श बैठ गया है, दीवारों में बड़ी दरारें पड़ी हैं। प्रशासन ने निरीक्षण के बाद जल्द से जल्द मुआवजा देने का आश्वासन दिया था, अब तक मुआवजा नहीं मिला है। दो महीने से किराए के मकान में रह रहे हैं। शांति प्रसाद, आपदा प्रभावित, पाटन
Iकेस 3I
मेरा दो मंजिला पुश्तैनी मकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया थ। मकान का फर्श बैठ गया, दीवारों में बड़ी बड़ी दरारें है। एसडीएम आईं थी तो उन्होंने कहा था मकान में रहना सुरक्षित नहीं है। उसके बाद से किराए के मकान में रह रहे हैं। जब मुआवजा मिला तो बड़ा झटका लगा, रहने के लिए पूरी तरह असुरक्षित मकान में आंशिक नुकसान दिखाया गया था। स्थानीय पटवारी की गलत रिपोर्ट पर मुआवजा दिया गया। -ज्ञान सिंह तोमर, खमरौली