उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की घटनाओं के संदर्भ में इस्तेमाल हो रहे 'लव जिहाद', 'जमीन जिहाद' जैसे शब्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने पर्यटकों के दबाव को देखते हुए बुनियादी ढांचे की विकास योजनाओं का भी जिक्र किया। यह मौका था 'अमर उजाला संवाद' का, जिसके तहत देहरादून में आज यानी सोमवार को देश की जानी-मानी शख्सियतें अलग-अलग मुद्दों पर अपने विचार रख रही हैं। पढ़ें, उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की वरिष्ठ पत्रकार निधि कुलपति के साथ हुई बातचीत के प्रमुख अंश...
निधि कुलपति: पहले यूनिफॉर्म सिविल कोड की बात नहीं होती थी, अब लोग कह रहे हैं कि 2024 से पहले यह राज्य में क्या हो रहा है?
मुख्यमंत्री धामी: देखिए, समान नागरिक संहिता को लेकर देश के अंदर लंबे समय से मांग है। ये मांग आज नहीं हो रही। हम उत्तराखंड के परिवेश के लिए मांग कर रहे हैं। जब 2022 का विधानसभा चुनाव था, तब हमने उत्तराखंड की जनता के सामने संकल्प रखा था कि जब नई सरकार का गठन होगा, तब हम यूसीसी को लागू करेंगे और इसका मसौदा तय करने वाली कमेटी का गठन करेंगे। कमेटी ने सभी वर्ग के लोगों से बात कर ली है। उसका मसौदा तैयार हो रहा है। मुझे लगता है कि इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। हम यह तुष्टीकरण या वर्ग विशेष के लिए नहीं लाए हैं। जो लोग जिहादी प्रवृत्ति के हैं, जो विधि या संविधान के अनुसार नहीं चलना चाहते, वे इसका विरोध कर सकते हैं, लेकिन देश का जनसामान्य इससे प्रसन्न है। मुस्लिम महिलाएं और अन्य प्रबुद्ध वर्ग भी इसका समर्थन कर रहा है।
निधि कुलपति: जमीन जिहाद शब्द का प्रयोग किया जा रहा है। कहा गया कि एक विशेष वर्ग को टारगेट किया गया है। हालांकि, अतिक्रमण करने वाले कुछ मंदिर भी उसकी जद में आए। जमीनी स्थिति क्या है?
मुख्यमंत्री धामी: मैं बताना चाहता हूं कि किसी भी वर्ग को नुकसान पहुंचाना हमारा उद्देश्य नहीं है। उत्तराखंड देवभूमि है। यहां सब भाईचारे में रहते हैं। यहां किसी के बीच कटुता, वैमनस्य नहीं है। सबके बीच सौहार्द है। हमने कहा है कि जितनी भी सरकारी जमीनें हैं, वहां जो अतिक्रमण हुआ है, वह किसी भी वर्ग का हो, वह खुद ही हटा दें। 2,200 एकड़ से भी ज्यादा जमीनों को अब तक अतिक्रमण मुक्त कराया जा चुका है। आने वाले समय में यह संख्या बढ़ने वाली है। जो लागू कानून को नहीं मानते, जिन्हें कानून के साथ जीने की आदत नहीं, वह इस मुद्द को उठाते हैं। एक पार्टी ने देश की आजादी के बाद तुष्टीकरण किया है। उन्हें यह खराब लग रहा है। सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण को कौन जायज ठहरा सकता है?
निधि कुलपति: उत्तराखंड में लंबा जाम देखने को मिल रहा है। आपने एक वक्त पर कैप लगाने की बात की थी। यहां तमाम राज्यों के पर्यटक तीर्थ और पर्यटन के लिए आते हैं। घंटों लंबे जाम जैसी चुनौतियों से कैसे निजात पाएंगे?
मुख्यमंत्री धामी: यहां सड़कें अच्छी बन गई हैं। एक समय था, जब यहां से बद्रीनाथ जाना कई घंटों का काम था। अब ऋषिकेश से शुरू करते हैं और ब्रदीनाथ कब पहुंच जाते हैं, पता ही नहीं चलता। आने वाले समय में दिल्ली-देहरादून एलिवेटेड का काम जब पूरा हो जाएगा। अगली बार हो सकता है कि लोग प्लेन की जगह सड़क मार्ग से आना चुनें। दिल्ली से देहरादून की उड़ानें कम हो जाएंगी, क्योंकि दो घंटे में ही दिल्ली से देहरादून का सफर पूरा हो जाएगा। पहले देहरादून से हरिद्वार पहुंचने में तीन घंटे या उससे ज्यादा समय लग जाता था। अब वीकेंड के दिनों को छोड़कर यह सफर 45 मिनट में पूरा हो जाता है। गढ़वाल से कुमाऊं, काशीपुर, रुद्रपुर, हल्द्वानी जाना हो तो वह दूरी भी कम हो जाएगी। अफजलगढ़ से नजीमाबाद की सड़क बनने वाली है। एक घंटे का सफर कम हो जाएगा। भारतमाला के तहत सड़कें बन रही हैं। इसके बावजूद जाम की स्थिति हो रही है। बहुत लंबा जाम लग रहा है। नैनीताल, हल्द्वानी, ऋषिकेश में जाम है क्योंकि उत्तराखंड आने का लोगों का आकर्षण बढ़ा है। एक दिन में तीस हजार से चालीस हजार रजिस्ट्रेशन केदारनाथ के लिए एक दिन में हो रहे हैं। 22 अप्रैल से अब तक 30 लाख लोग यहां तीर्थ यात्रा पर आए हैं। सबसे ज्यादा 10 लाख लोग केदारनाथ के दर्शन कर चुके हैं। शुक्रवार को यहां देहरादून से मुजफ्फरनगर तक जाम लगता है। मैं भी एक दिन सड़क से गया तो पता चला कि शुक्रवार आते ही सब लोग उत्तराखंड आना चाहते हैं तो जाम की समस्या तात्कालिक रूप से है। यह आगे भी होगी। आने वाले 25 वर्षों में किस प्रकार से यहां लोगों का दबाव होगा, किस तरह आबादी बढ़ेगी, आवागमन बढ़ेगा, उसी को ध्यान में रखकर विकास कार्य कर रहे हैं। नीति आयोग की बैठक में भी हमने अनुरोध किया था कि हमारे राज्य को जो सुविधाएं मिलती हैं, उनमें हमें जो हिस्सेदारी मिलती है, वह हमारी 1.25 करोड़ की आबादी के हिसाब से मिलती है। लेकिन हमें हर साल सात करोड़ लोगों के लिए इंतजाम करना पड़ता है। अमृतकाल के 25 वर्ष कैसे होंगे, उसके लिए व्यवस्थाएं कैसी हों, उसके लिए रोडमैप बना रहे हैं।