मानवी नौटियाल, फिल्म निर्माता : विभिन्न स्कूल-कॉलेज समेत लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए), मसूरी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में थिएटर फैकल्टी के रूप में काम कर रही हैं। इसके अलावा वह संस्कार भारती की देहरादून इकाई के लिए मुख्य थिएटर प्रभारी के पद पर भी हैं। मानवी एक स्वतंत्र फिल्म निर्माता हैं। उन्होंने कंटेंट-स्क्रीन राइटर, निर्देशक, कला निर्देशक के साथ-साथ एक अभिनेता के रूप में भी काम किया है। मानवी विभिन्न सरकारी विभागों व मंत्रालय के लिए कई लघु फिल्में, टेलीफिल्म्स और संगीत वीडियो बना चुकी हैं।
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श्रीश डोभाल, वरिष्ठ रंगकर्मी : राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के परा-स्नातक श्रीश डोभाल ने उत्तरी भारत की अग्रणी संस्था ''शैलनट' की स्थापना, कलाप्रेमी युवाओं व अध्यापकों के सहयोग से 10 नगरों में की। भारत की 15 भाषाओं में, कई प्रदेशों में, विविध शैलियों में 110 से अधिक नाटक निर्देशित किए। उत्तराखंड की विस्तृत सांस्कृतिक नीति सरकार को 2002 में प्रस्तुत की। मानव संसाधन मंत्रालय की 'सीनियर फैलोशिप' व 'उत्तराखंड विभूषण' आदि पुरस्कारों से सम्मानित। तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त फिल्मों सहित 11 फीचर फिल्मों में अभिनय। महात्मा गांधी की मुख्य भूमिका तीन धारावाहिकों में। एक फीचर व कुछ डाक्यूमेंटरी फिल्मों का निर्देशन। दो बार 'ग्लोबल फिल्म फेस्टिवल'' की ज्यूरी में रहे।
जयदेव भट्टाचार्य, लघु फिल्म निर्माता : करीब 22 साल मुम्बई फिल्म इंडस्ट्रीज में काम का अनुभव। सिनेमेटोग्राफर और शॉर्ट फिल्म मेकर। वो सुबह कभी तो आएगी, भूल, और अंत में, रक्तरंजित जैसी फिल्मों के निर्माता। और अंत में को बेस्ट शॉर्ट फिल्म का अवार्ड भी मिला। इसके अलाव बतौर निर्माता, निर्देशक तमाम सम्मान प्राप्त।