आजकल स्ट्रेस के मामले बढ़ने के सवाल पर डाक्टर सोना कौशल ने जवाब दिया कि इस समय हम जो भी बात कर रहे हैं वह सेल्फ की कर रहे हैं। किसी दूसरे के बारे में बात नहीं कर रहे। सबसे पहले हमें स्ट्रेस के बारे में जानकारी करनी होगी। परीक्षा, टेस्ट, ज्यादा सोचना स्ट्रेस है। इनके बारे में सोच-सोच कर मैं जो अपने अंदर पैदा कर रही हूं, वह स्ट्रेस होता है।
दिक्कत अंदर नहीं होती है, वह बाहर होती है। यहीं स्ट्रेस शरीर में दस बीमारियों को पैदा करती है। मैं जो भी हूं, यह मेरी सोच है। हमें खुश रहना है या फिर परेशान रहना है, यह मेरी सोच है। आप किसी को बदल नहींं सकते हैं, बदल सकते है तो सिर्फ अपनी सोच। अपनी सोच बदलकर ही मैं आगे बढ़ सकता हूं। अगर मां ही स्वस्थ नहीं होगी तो वह बच्चे का किस प्रकार ध्यान रख पाएगी। आप खुश रहकर ही दूसरों की देखभाल कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि सक्सेस का मूलमंत्र सिर्फ यही है कि आज मैंने नया सीखा। बस जो नई चीज सीखी वह मेरा सक्सेस है। सेल्फेसिटी के बारे में बताया कि मैं अपने आप को कैसे देखूं, यह सेल्फेसिटी में आता है। उन्होंने युवाओं को इस प्रकार के कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में यह रहे मौजूद
मेधा कथूरिया, खुशी, महक, मीनाक्षी रावत, मानवी नौटियाल, राधिका, आयुष, नेहा, अनुष्का, गरिमा, ममता, खुशबू, संजना मेधा भट्ट।