माय सिटी रिपोर्टर देहरादून कोरोना वायरस के चलते लागू लॉकडाउन के बीच राज्य सरकार की ओर से अर्थव्यवस्था को नए सिरे से पटरी पर लाने के लिए अपने स्तर से पहल शुरू कर दी है । राज्य सरकार की ओर से गठित समिति ने सार्वजनिक वाहन संचालकों के सुझाव मांगा है कि नए सिरे से अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सार्वजनिक वाहनों के संचालन में क्या क्या कदम उठाए जा सकते हैं । देहरादून महानगर सिटी बस सेवा महासंघ ने सरकार की ओर से गठित समिति को सुझाव दिया है कि यदि सार्वजनिक वाहन संचालकों की माली हालत को ठीक करना है तो सबसे पहले डीजल को जीएसटी के दायरे में लाना होगा । साथ Hई महासंघ ने मांग उठाई है कि जो व्यावसायिक वाहन लॉक डाउन के चलते खड़े हैं और उनका इंश्योरेंस या टैक्स पहले ही समाप्त हो चुका है तो इंश्योरेंस में छूट दी जाय। जीएसटी 28 की जगह 18 फीसदी वसूला जाए । महासंघ अध्यक्ष विजय वर्धन डंडरियाल का कहना है कि जिन गाड़ियों का इंश्योरेंस मार्च 2020 से आगे के महीने के लिए खत्म था । लाकडाउन खुलने के बाद छह महीना के लिए इंश्योरेंस में छूट दी जाए । साथ ही गाड़ियों के स्पेयर पार्ट्स और टायरों पर लगाए गए 28 फ़ीसदी जीएसटी की जगह 10 पीस सीजीएसटी वसूला जाए ताकि गाड़ी संचालकों को राहत मिल सके। इसके साथ ही जिन व्यावसायिक वाहन संचालकों ने अप्रैल 2020 से टैक्स नहीं दिया है और जिन की गाड़ियां खड़ी हैं उन गाड़ी संचालकों को टैक्स में एक साल की छूट दी जाए । यदि सरकार ने सार्वजनिक वाहन संचालकों के लिए इंश्योरेंस टैक्स में छूट का प्रावधान प्रावधान नहीं किया तो उन्हें गाड़ी संचालित करना आसान नहीं होगा।