अमर उजाला और सांस्कृतिक संस्था धाद की ओर से हरेला महापर्व एवं घी संग्रांद महाभियान के तहत दून विश्वविद्यालय मेें कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर विशेषज्ञों ने राज्य की जीडीपी में कृषि के साल दर साल घटने योगदान पर चिंता जताई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि कृषि क्षेत्र की किसी भी राज्य की आर्थिकी में बड़ा योगदान देने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कृषि के क्षेत्र में ऋण की सुविधा को सरल किया गया है, लेकिन फिर भी कृषि क्षेत्र का जीडीपी में योगदान महज दो फीसदी है जो चिंता का विषय है। कहा कि कृषि के क्षेत्र में बेहतर विकास के लिए महिलाओं को ताकत देनी होगी।
सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में प्रोफेसर एमसी सती ने कहा कि राज्य में अन्न की विविधता की एक बहुत ही बड़ी श्रृंखला है। जो पर्यावरण पारिस्थितिकी को समृद्ध करने के साथ-साथ सांस्कृतिक संरक्षण, जैव विविधता और एग्रो इकोसिस्टम को विशिष्ट बना रही है। प्रोफेसर सती ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में आज भी पलायन के बावजूद महिलाओं ने बारहनाजा खेती को जीवित रखा है। दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर सुरेखा डंगवाल ने कहा कि महिलाओं का सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण पूरे देश में उत्तराखंड में सर्वाधिक है। महिलाओं की श्रम शक्ति उत्तराखंड की आर्थिक गतिविधियों में सार्थक रूप से देखी जा सकती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता धाद संस्था के अध्यक्ष लोकेश नवानी और संचालन संस्था के महासचिव तन्मय ममगाईं ने किया। कार्यक्रम में डॉ. राकेश भट्ट, किरण शांति बिंजोला, रक्षा बौड़ाई, नीलिमा धुलिया ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। इस मौके पर प्रो. राजेंद्र ममगाईं, प्रेम बहुखंडी, सारिका राणा, उत्तम सिंह रावत, टीआर बरमोला, दयानंद डोभाल, मनोहर लाल, महावीर सिंह रावत, गणेश चन्द्र उनियाल, किशन सिंह, नीना रावत आदि मौजूद रहे।