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I- ज्यादातर नेपाल मूल के युवाओं से विदेश भेजने के नाम पर ठगी गई है रकमI
विदेश भेजने के नाम पर ठगी करने वाले कबूतरबाजों के खिलाफ कार्रवाई के बाद अब अन्य पीड़ित भी पुलिस के पास पहुंचना शुरू हो गए हैं। रविवार को दो युवकों ने पुसिल को आपबीती बताई। वर्क एब्रॉड नाम की इस कंसलटेंसी के संचालकों ने इनसे भी लगभग 10 लाख रुपये ठगे हैं।
संचालकों ने इन्हें पोलैंड और कनाडा भेजने के नाम पर यह रकम ली थी, लेकिन अब तक कोई जवाब कंसलटेंसी से नहीं आया है। कंसलटेंसी के संचालक दंपती और उनके दोनों साथी अभी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। बता दें कि बीते दिनों दो युवकों का एक वीडियो वायरल हुआ था। ये दोनों आर्मेनिया में फंसे हुए थे और सरकार से खुद को वहां से निकालने की गुहार लगा रहे थे। यह वीडियो जब पुलिस के पास पहुंचा तो पुलिस ने कंसलटेंसी का पता लगाया। शनिवार को पुलिस पटेलनगर थाना क्षेत्र के चंद्रबनी स्थित वर्क एब्रॉड कंसलटेंसी फर्म के दफ्तर में पहुंची। यहां बैठी एचआर मैनेजर से पूछताछ की गई तो पता चला कि इसे अंकुल सैनी और उसकी पत्नी तराना सैनी संचालित करते हैं।
पुलिस के आने की भनक लगते ही दोनों अपने दो अन्य साथियों के साथ वहां से भाग निकले। आरोपियों ने इन दोनों युवकों को आर्मेनिया की एक कंपनी का फर्जी ऑफर लेटर भी बनाकर दिया था। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ जालसाजी और धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर लिया। मीडिया में जब रविवार को यह खबर प्रसारित हुई तो इसे पढ़कर दो युवक अमित नौटियाल निवासी नैनबाग टिहरी मनदीप सिंह निवासी उत्तरकाशी भी रविवार को पुलिस के पास पहुंचे।
उन्होंने इस बाबत आईएसबीटी चौकी पर प्रार्थनापत्र दिया। इसमें उन्होंने बताया कि अंकुल सैनी और तराना सैनी ने उन्हें पोलैंड और कनाडा भेजने के नाम पर पैसे लिए थे। इनमें अमित से 7.50 लाख रुपये और मनदीप से 2.34 लाख रुपये लिए गए। इसके बाद से उन्हें कुछ नहीं दिया गया। सैनी दंपती से संपर्क का प्रयास किया गया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि मुकदमे में इन दोनों पीड़ितों के प्रार्थनापत्रों को भी शामिल कर लिया गया है। मामले में जांच की जा रही है।
Iज्यादातर नेपाल के लोगों को बनाया शिकारI
आरोपियों के कमरे से जब पुलिस ने तलाशी ली तो वहां से 68 पासपोर्ट बरामद हुए थे। साथ ही ब्लैंक चेक और फर्जी ऑफर लेटर भी पुलिस ने जब्त किए। वहां से तीन पासपोर्ट और तीन ब्लैंक चेक व छह जॉब ऑफर लेटर नेपाली मूल के लोगों के थे। ऑफिस में जो रजिस्टर रखा हुआ था, उससे पता चला कि आरोपियों ने अब तक 40 से अधिक नेपाल मूल के युवाओं को विभिन्न देशों में नौकरी के नाम पर भेजा है।