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काव्य संग्रह कविता अभिराम भाग-6 के लोकार्पण पर रचनाकारों को किया गया सम्मानित
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Iदेवप्रभा प्रकाशन की ओर से पुस्तक लोकार्पण और सम्मान समारोह का आयोजन दून पुस्तकालय में किया गया। पद्मश्री लीलाधर जगूड़ी की अध्यक्षता में हुए कार्यक्रम में काव्य संग्रह कविता अविराम भाग-6 का लोकार्पण किया गया। रज्जू भैया सैनिक विद्या मंदिर, बुलंदशहर के चेयरमैन सीएल बरेजा ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।
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Iउन्होंने कहा, कई सालों से समाज के कर्णधारों ने हिंदी भाषा का बंटाधार किया है, लेकिन 70 साल बाद अब वह समय आ गया है, जब हिंदी भाषा को उसका असल दर्जा मिल रहा है। इस मौके पर उत्तराखंड के 46 रचनाकारों को सम्मानित किया गया। विशिष्ट अतिथि पत्रकार वीरेंद्र डंगवाल पार्थ ने कहा, कविता अभिराम काव्य संग्रह में पहाड़ के 46 रचनाकारों की कविताएं संग्रहित हैं। उन्होंने कहा, भाषा कोई भी हो उसका शुद्ध रूप पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाना चाहिए। ताकि, भाषा का सही रूप सामने आ सके।
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Iदेवप्रभा प्रकाशन के निर्देशक चेतन आनंद ने कहा, कविता अभिराम भाग-6 में जिन कवियों की कविताएं संकलित हैं, उनके लिए जल्द ही एक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस मौके पर अलका शर्मा के गजल संग्रह झरोखे एहसास के का भी लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में पंकज बिजलवान, डॉ. नीरजा चतुर्वेदी, कुसुम लता पुंडोरा आदि मौजूद रहे।
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इन रचनाकारों को किया गया सम्मानित
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Iरचनाकार कुसुम लता पुंडोरा (कुसुम), भगत सिंह राणा (हिमाद), डॉ़ मनोज जोशी, कृष्णानंद नौटियाल, सुरेंद्र सिंह रावत, नदंन राणा नवल, राजेश जोशी, सुरेशचंद्र जोशी, अंशी कमल, सुरेश सेमवाल, संगीता बहुगुणा, सुभाष सेमल्टी, रोशनी पोखरियाल, कमला उनियाल, सुनीता सेमवाल (ख्याति), युद्धबीर सिंह बिष्ट, सन्नू नेगी, डॉ. ममता जोशी (स्नेहा), विनीता भट्ट (सिलोडी), राकेश असवाल, अनीता जोशी, ज्योति बिष्ट (जिज्ञासा), सिद्धि डोभाल, विमला राणा, सरोज डिमरी, ज्योति कपरुवाण, सुमन किमोठी, नीलम डिमरी, अंजना कंडवाल (नैना), साईनी कृष्ण उनियाल, गीता मैदुली, संगीता बिष्ट (कौमुदी), आशा नेगी पंवार, दीपलता झिंकवाण, पूनम तिवारी, दीपा नेगी बिष्ट, प्रियंका भट्ट (प्रिया), रश्मि पैन्यूली, आशा भट्ट, वर्णी पाल, वीरेंद्र डंगवाल (पार्थ), मधुरवादिनी तिवारी, वीणावादिनी उनियाल, दीपिका वल्दिया, कविता बिष्ट (नेह) और मणि अग्रवाल समेत गुलमोहर के फूल की संपादक पुष्पलता ममगाईं को सम्मानित किया गया।
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मानवता की राह पर चलें : जगूड़ी
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Iपद्मश्री लीलाधर जगूड़ी ने कहा, भौतिक होना सबसे बड़ी बात है। अगर हमने लकड़ी, पत्थर और पानी को नहीं जाना तो कुछ नहीं जाना। उन्होंने अपनी लिखी दो कविताओं का पाठ भी किया। उन्होंने सभी को मानवता की राह पर चलने का संदेश दिया। बतादें कि साहित्यकार लीलाधर जंगूड़ी उत्तराखंड के टिहरी जिले के रहने वाले हैं। साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, साहित्य अकादमी, व्यास सम्मान सहित विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।I