गवेला गांव स्थित क्षेत्र के आराध्य देव कुकुर्सी महाराज मंगलवार को ध्यातुड़ियों (बेटियों) के आग्रह पर आरा गांव पहुंचे। गांव की ध्यातुड़ियों, महिलाओं और पुराणों (बुजुर्गों) ने नतमस्तक होकर देव पालकी का जोरदार स्वागत किया गया। ध्यातुड़ियों ने देवता को करीब एक किलोग्राम चांदी की डोरियां अर्पित कर घर-परिवार की सुख, आरोग्य और समृद्धि के लिए आशीष मांगा।
गवेला गांव स्थित महासू देवता का जेष्ठ वीर कुकुर्सी महाराज खत पशगांव के साथ ही अष्टी और आरा गांव के कुल देवता हैं। यह देवता खासकर ध्यातुड़ियों के हितैषी हैं। मंगलवार को देवता ध्यातुड़ियों के आग्रह पर आरा गांव पंहुचे। देव पालकी दोपहर 2.00 बजे गवेला गांव स्थित गर्भगृह से आरा गांव की यात्रा के लिए निकाली गई। गवेला गांव से दसऊ गांव स्थित चालदा महासू देवता के दर्शन के बाद हाजा गांव, फेडूलानी, अष्टी होते हुए शाम करीब 5.00 बजे पालकी आरा गांव पहुंची। श्रद्धालुओं ने जगह-जगह देव पालकी के दर्शन किए।
गांव की अविवाहित और विवाहित 200 ध्यातुड़ियों ने आपसी सहयोग से बने करीब एक किलोग्राम चांदी की डोरियां देवता को अर्पित कीं। उसके बाद देव पालकी और देव चिह्न गांव के स्याणा जगत सिंह के घर विराजमान किए गए। यहां पूरी रात देव चिह्नों के साथ गांव के लोग जागरण करेंगे। बुधवार सुबह पूजा-अर्चना के बाद शाम को देव पालकी गांव के संतन सिंह के घर पर एक रात के लिए रूकेगी।
इस दौरान पुजारी मोती राम, भंडारी टीकम सिंह, बजीर व गांव स्याणा आनंद शर्मा, चतर सिंह, तारादत्त, अतर सिंह, सियाराम रणवीर शर्मा, रूप राम, अमर सिंह सहित कई लोग मौजूद थे।