रविवार को महर्षि दयानंद सरस्वती की 200वीं जयंती पर श्रद्धानंद बाल वनिता आश्रम में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। समापन पर 21 कुंडीय वैदिक यज्ञ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें आचार्य डॉ. धनंजय, आचार्य अनुज शास्त्री, आचार्य विद्यापति शास्त्री ने वैदिक मंत्रोच्चारण किया। कार्यक्रम में वैदिक शिक्षा व्यवस्था पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम में स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने कहा की राष्ट्र के सभी वर्गों को एकजुट होकर वैदिक शिक्षा व्यवस्था को स्थापित करना चाहिए। अपनी संस्कृति अपनी विरासत पर हमें गर्व होना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तराखंड प्रधान प्रतिनिधि डीपी यादव ने की। आश्रम के सौ वर्ष पूर्ण होने पर सभी विद्वानों व अधिकारियों ने स्मारिका का विमोचन किया गया।
योगेश भारद्वाज ने राष्ट्र के सम्मुख चुनौतियां और सत्य सनातन वैदिक धर्म के आधार पर उनका समाधान विषय विचार रखे। उन्होंने कहा कि हिंदुओं को अपनी घटती संख्या पर विचार करना पड़ेगा और बढ़ते धर्मांतरण पर रोक लगानी होगी। हिंदू समाज को अपनी संस्कृति पर गर्व करना चाहिए।
आर्य समाज धामावाला के प्रधान सुधीर गुलाटी, स्वामी श्रद्धानंद बाल वनिता आश्रम के अधिष्ठाता धीरेंद्र मोहन सचदेवा के नेतृत्व में आश्रम के लगभग 50 पूर्व छात्राओं व कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में गुरुकुलों के ब्रह्मचारी व ब्रह्मचारिणियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। संचालन युवा विद्वान आचार्य अनुज शास्त्री ने किया।