नवीन चकराता पुरोड़ी और आसपास के आधा दर्जन कस्बों में मई-जून से पहले ही पेयजल संकट खड़ा हो गया है। यहां करीब तीन हजार की आबादी को केवल पीने भर का पानी मिल पा रहा है। दिनभर में महज 30 मिनट के लिए ही पानी की आपूर्ति हो रही है, उसमें भी लो-प्रेशर की समस्या बनी हुई है। लोग केवल पीने का ही पानी भर पा रहे हैं। उन्हें सार्वजनिक नलों और एक किलोमीटर दूर स्रोत से पानी ढोना पड़ रहा है। वहीं, स्थानीय होटल और रेस्टोरेंट व्यवसायी टैंकर से पानी की आपूर्ति करते हैं।
वर्ष 2007-08 में जल निगम ने करीब 36 किमी दूर स्थित सिजला खड्ड से छटोऊ तक पेयजल योजना का निर्माण करवाया गया था। इसमें करीब तीन करोड़ की लागत आई थी। योजना से नवीन चकराता पुरोड़ी, लांगा पोखरी, बिरमोऊ डांडा, थयमी खेड़ा, रामताल गार्डन, माक्टी पोखरी सहित आधा दर्जन से अधिक कस्बों की तीन हजार की आबादी को पेयजल आपूर्ति की जाती है। वर्तमान में यह योजना लोगों को पर्याप्त पानी नहीं दे रही है। केवल 30 मिनट ही पानी मिल पा रहा है। पानी का प्रेशर भी बहुत कम है। कई लोग इस दौरान सार्वजनिक नलों से पानी भरते हैं। अन्य कार्यों के लिए पुरोड़ी से करीब एक किलोमीटर दूर जलस्रोत से पानी भरकर लाना पड़ता है। नवीन चकराता पर्यटन क्षेत्र हैं, यहां कई होटल और रेस्टोरेंट भी हैं। यहां के व्यवसायी टैंकर मंगवाकर पानी की आपूर्ति करते हैं। कई बार पानी की किल्लत से होटल और रेस्टोरेंट में ठहरने वाले पर्यटकों को भी दो चार होना पड़ता है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पेयजल समस्या साल के 12 महीने बनी रहती है। गर्मियों में तो स्थिति और गंभीर हो जाती है।
जलसंस्थान देहरादून के अधीशासी अभियंता राजेंद्र पाल सिंह ने कहा कि गर्मी के चलते पेयजल स्त्रोत में पानी की कमी हुई हुई। नवीन चकराता क्षेत्र में पिछले 10 साल में जनसंख्या भी बढ़ी है। होटल और रेस्टोरेंट का भी निर्माण हुआ है। क्षेत्र के लिए नई पेयजल योजना के निर्माण की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।