ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
डीजल के दामों में बढ़ोत्तरी से उत्तराखंड परिवहन निगम को प्रतिदिन 14 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ रहा है। दामों में कमी न आने पर निगम को साल में 50.40 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा। इस अतिरिक्त खर्च की भरपाई करने के लिए निगम के प्रबंधन निदेशक ने शासन को पत्र लिखा है। उन्होंने यूपी की तर्ज पर निगम को ग्रांट जारी करने की मांग की है। उत्तराखंड परिवहन निगम के पास 1600 के करीब बसों का बेड़ा है। बसों का राज्य के अलावा अन्य कई राज्यों में संचालन होता है। अफसरों के मुताबिक बसों के संचालन को प्रतिदिन एक लाख लीटर डीजल की खपत होती है। अक्तूबर 2017 में डीजल की कीमत 55 रुपये प्रति लीटर थी, जो वर्तमान में बढ़कर 69 रुपये प्रति लीटर हो गई है। निगम के प्रबंध निदेशक बीके संत ने बताया कि बसों के संचालन के लिए निगम को 14 लाख रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। बताया कि साल 2017- 18 में निगम को 22 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है, इसकी मुख्य वजह डीजल की बढ़ी कीमतें हैं। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक आदि प्रदेशों में सरकार की ओर से परिवहन निगमों को भारी भरकम ग्रांट दी जा रही है, जिसकी वजह से सभी परिवहन निगम मुनाफे में चल रहे हैं। जबकि उत्तराखंड में ऐसा नहीं है। उन्होंने शासन को पत्र लिखकर ग्रांट जारी करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने निगम की ओर से निशुल्क यात्रा कराने व आपदाओं के दौरान पीड़ितोें को निशुल्क बस सुविधा मुहैया कराने की मद में भी बकाया बजट जारी करने की मांग की है।