सार
बार एसोसिएशन के चुनाव में 51 प्रत्याशियों के भाग्य मतपेटियों में बंद है। 3,815 में से 2,675 अधिवक्ताओं ने वोट दिया।आज मतगणना के बाद नई कार्यकारिणी की घोषणा होगी। सीसीटीवी निगरानी में पेटियां रखी गईं।
बार एसोसिएशन के चुनाव में इस बार 70.11 फीसदी मतदान हुआ। 3,815 अधिवक्ता मतदाताओं में से 2,675 ने वोट दिया। शाम पांच बजे मतपेटियों को सील कर सीसीटीवी की निगरानी में रख दिया गया। अब बुधवार को मतगणना के बाद नई कार्यकारिणी की घोषणा की जाएगी।
बार एसोसिएशन की 11 सदस्यीय कार्यकारिणी के चुनाव शांतिपूर्ण संपन्न हो गए। मतदान सुबह करीब 9:30 बजे शुरू हुआ। इस बार चुनाव मैदान में कुल 51 प्रत्याशी हैं। इनमें निवर्तमान अध्यक्ष अनिल शर्मा उर्फ बंटू, आलोक घिल्डियाल, मनमोहन कंडवाल, राजीव शर्मा उर्फ बंटू भाई और शिवचरण सिंह रावत अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़े। इनके अलावा उपाध्यक्ष और सचिव पद पर आठ-आठ प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। वोटिंग के लिए मंगलवार सुबह से ही अधिवक्ताओं की लाइन लगना शुरू हो गई थी। अपने-अपने पक्ष में वोटिंग की अपील करने के लिए प्रत्याशियों को मतदान केंद्र के बाहर खड़ा किया गया था।
शाम पांच बजे तक वोटिंग पूरे उत्साह से चलती रही। कुल 3815 मतदाताओं में से करीब 70.11 फीसदी अधिवक्ताओं ने मतदान किया। मतपेटियों को बार भवन में सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रखा गया है। अब बुधवार को सुबह 10 बजे से मतगणना शुरू की जाएगी। इसके लिए सभी प्रत्याशियों के एक-एक एजेंट को मतगणना केंद्र में रहने की अनुमति होगी। मतगणना देर शाम तक चलने की संभावना जताई जा रही है।
पिछले साल टूटी जोड़ी के इस बार लगाए जा रहे कई मायने
लगातार पांच बार के अध्यक्ष और सचिव रहे मनमोहन कंडवाल और अनिल शर्मा की जोड़ी पिछले साल टूटने के बाद इस साल इसके कई मायने लगाए जा रहे हैं। पिछले साल कंडवाल चुनाव नहीं लड़े थे तो शर्मा की लगभग एकतरफा जीत हुई। लेकिन, इस बार दोनों एक ही पद पर आमने-सामने हैं। ऐसे में अधिवक्ताओं के वोट से इन दोनों में से किसी एक के सिर जीत का सेहरा सजेगा या फिर किसी तीसरे को इसका लाभ मिलेगा। इसके लिए चुनावी पंडित वोटिंग समाप्त होने के बाद गणित लगाने में जुट गए हैं। सभी अपने अपने हिसाब से इस बात के मायने लगा रहे हैं।
इस बार के चुनाव में अध्यक्ष पद पर रोमांचक मुकाबला है। पांच प्रत्याशियों में चार को कार्यकारिणी में लंबे समय तक रहने का अनुभव है। जबकि, इनमें से तीन दो बार या इससे अधिक अध्यक्ष और सचिव रह चुके हैं। पिछले साल से पहले तक अध्यक्ष और सचिव पद पर मनमोहन कंडवाल और अनिल शर्मा की जोड़ी लगातार पांच साल से जीत हासिल कर रही थी। लेकिन, पिछले साल इस जोड़ी का तिलिस्म टूट गया और मनमोहन कंडवाल चुनाव मैदान में नहीं उतरे। हालांकि, उन्हें पिछले साल पर्चा खरीदने की लाइन में देखा गया था मगर एकाएक वह वहां से हट गए। इससे अनिल शर्मा की एकतरफा जीत हुई। इस बार दोनों दिग्गज एक साथ एक ही पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में इस बात के कई मायने निकाले जा रहे हैं।
दोनों में से एक को मिलेगी जीत या तीसरे को फायदा
अब देखने वाली बात यह है कि जीत का सेहरा इन दोनों में से किसी एक के सिर सजेगा या फिर कोई तीसरा बाजी मार जाएगा। वोटिंग के साथ-साथ कचहरी में दिनभर इस बात की चर्चाएं रहीं कि निवर्तमान कार्यकारिणी और बीते कई वर्षों से चली आ रही गतिविधियों से अलग इस बार अधिवक्ता किसी तीसरे चेहरे को देखना चाहते हैं। मगर इस बात से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है कि कंडवाल और शर्मा दोनों ही लंबे समय तक अधिवक्ताओं की पसंद रहे हैं तो फिर से इन्हीं में से किसी को विजय मिल सकती है। जबकि, तीसरे विकल्प के रूप में राजीव शर्मा उर्फ बंटू को भी अधिवक्ता अपना नेता चुन सकते हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक घिल्डियाल और शिवचरण सिंह रावत भी कचहरी में अपनी अलग पहचान रखते हैं। इस तरह इन दोनों के नामों की भी खूब चर्चाएं रहीं। हालांकि, असल तस्वीर बुधवार शाम तक ही साफ हो पाएगी।
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