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Dehradun News: हाथी के गोबर की डायरी और हस्तशिल्प उत्पाद आ रहे पसंद

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परेड ग्राउंड में आदि गौरव महोत्सव के दौरान लगाए गए 40 स्टाल आकर्षण का केंद्र बने हैं। इसमें कई तरह के उत्पाद हैं। इन उत्पादों के जरिए देशभर के जनजातीय समुदाय की समृद्ध और विविधतापूर्ण धरोहर को प्रदर्शित किया जा रहा है।
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हस्तशिल्प से लेकर ऊनी कपड़ों तक के स्टाल पर लोगों की भीड़ लग रही है। कर्नाटक निवासी मनान यहां विशेष डायरी बेच रहे हैं। मनान बताते हैं कि उन्होंने हाथी के गोबर से डायरी बनाई है। इसके साथ ही बेकार चीजों का इस्तेमाल कर नई चीजें बनाई हैं।

महोत्सव में करीब एक हजार जनजातीय शिल्पकार भाग ले रहे हैं। इसमें जनजातीय संस्कृति, शिल्प, खान-पान, वाणिज्य और पारंपरिक कला को प्रदर्शत किया जा रहा है। राज्य जनजातीय शोध संस्थान की ओर से बिरसा मुंडा की जयंती पर आदि गौरव महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। महोत्सव में पहले दिन अलग-अलग राज्यों के कलाकारों की ओर से लगाए गए स्टाल पर दूनवासियों ने खूब खरीदारी की। शिमला बाईपास निवासी अंकुश ने बिस्किट, झंगुरे और मांडू का स्टाल लगाया। उन्होंने बताया कि यह बिस्किट हाथों से बनाए जाते हैं। इनकी कीमत 100 से 500 रुपये तक है।
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स्वेटर और कुशन के स्टाल पर भी काफी भीड़ रही। यहां 800 से 5000 रुपये तक के स्वेटर हैं। कश्मीर निवासी इम्तियाज ने बताया कि उनका गर्म कपड़ों का स्टाल है। कश्मीर में मशीन से ऊनी कपड़े नहीं बनते, वहां सभी कपड़े हाथों से बनाए जाते हैं। इन ऊनी कपड़ों की खासियत है कि यह पश्मीना, कांजी, कलमकारा और ऊन से बनाए जाते है। इन कपड़ों की काफी डिमांड रहती है।



बनारस निवासी अमन ठाकुर ने बताया की उन्होंने बनारसी साड़ियों की प्रदर्शनी लगाई है। यहां 1500 से 1 लाख रुपये तक की साड़ियां मौजूद हैं। सभी साड़ियां हाथों से बनाई गई हैं। एक लाख की साड़ी में डिजाइनर काम सोने और चांदी से किया गया है। सिल्क की साड़ियों की भी काफी मांग की जा रही है।
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