ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
आशा फैसिलिटेटरों ने राज्य सरकार से 30 दिन का भत्ता दिए जाने की मांग की है। फैसिलिटेटरों ने मांग पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। आशा फैसिलिटेटरों का कहना है कि उनसे पूरे माह काम कराया जाता है जबकि भुगतान केवल 20 दिन का किया जाता है। इस बाबत कई बार अलग-अलग स्तरों पर अपील की जा चुकी है, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। जून से अगस्त तक उनसे विकास खंड समन्वयक, कम्युनिटी मोबलाइजर और डाटा सहायक का काम भी कराया गया, लेकिन आज तक मानदेय नहीं मिला। आशा फैसिलिटेटरों का कहना है कि वे स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए काम कर रहे हैं। ऐसे में प्रदेश के स्वास्थ्य सिस्टम को मजबूत करने के लिए उन्हें राज्य कर्मचारी घोषित किया जाए। जिलाध्यक्ष रेनू नेगी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने विधानसभा सत्र के दौरान आशाओं व आशा फैसिलिटेटरों के लिए 33 करोड़ रुपये की धनराशि का एलान किया था, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ है। आशा फैसिलिटेटरों ने जल्द मांगें पूरी न होने पर वह उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। इस अवसर पर अमिता चौहान, कंचन बंसल, सरस्तवी रावत, आशा नौटियाल, दिनेश चंद्र पांडेय समेत अन्य मौजूद रहे।