श्रीनगर। गढ़वाल विवि दिवाली के दौरान पटाखों-आतिशबाजियों से अलकनंदा घाटी में वायु की गुणवत्ता पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन करेगा। इसके लिए विवि के ग्रामीण प्रौद्योगिकी विभाग और भौतिकी विभाग ने संयुक्त रुप से बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे विवि कैश काउंटर में उपकरण (हाई वॉल्यूम सेंपलर) स्थापित किए हैं। ग्रामीण प्रौद्योगिकी विभागाध्यक्ष डा. आरएस नेगी और भौतिकी विभाग के सहायक प्रोफेसर डा. आलोक सागर गौतम ने बताया कि दिवाली के पहले (5 नवंबर) और बाद (9 नंवबर) वायु गुणवत्ता का आकलन किया जाएगा। विवि कैश काउंटर की छत में कणों के नमूने के लिए हाई वॉल्यूम सैंपलर स्थापित किए गए हैं। इन सैंपलर में 2.5 माइक्रोमीटर और 10 माइक्रोमीटर कणों के नमूने एकत्रित किए जाएंगे। इसके बाद प्रयोगशाला में विश्लेषण कर देखा जाएगा कि इनमें कितने हानिकारक तत्व हैं। उन्होंने बताया कि 2.5 माइक्रोमीटर कण स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक हैं। बहुत सूक्ष्म होने की वजह से यह कण सांस के साथ फेफड़ों में चले जाते हैं।