हरिद्वार। जिलाधिकारी दीपक रावत की सख्ती भी टिबड़ी में नगर निगम और बीएचईएल की जमीन पर कब्जा जमाए और निर्माण करने वाले लोगों पर नहीं हो रहा है। टिबड़ी वाटर वर्क्स की नगर निगम के स्वामित्व की भूमि पर कब्जा व निर्माण का सिलसिला राजनीतिक संरक्षण में बदस्तूर जारी है। राजनीतिक दखलंदाजी इस कदर हावी है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद निगम अधिकारी लाखों रुपये के एक भूखंड को कब्जे में नहीं ले पाएं हैं। जिलाधिकारी ने विवादित भभूतावाला बाग की भूमि सहित टिबड़ी की भूमि की संयुक्त रुप से पैमाईश कराकर उप जिलाधिकारी को भेल व नगर निगम की भूमि का सीमांकन कराने का निर्देश दिया था। भूमि की रजिस्ट्री करने वाले व्यक्ति को भी डीएम ने अपने मालिकाना हक के अभिलेखों और रजिस्ट्री के साथ तलब किया है। बीएचईएल के संपदा विभाग के अधिकारियों को भी अपने संपत्ति अभिलेखों के साथ बुलाया था लेकिन, तहसील प्रशासन ने अभी तक टिबड़ी की भूमि की पैमाईश और सीमांकन नहीं किया है। तहसील प्रशासन पहले से इस भूमि की पैमाईश करने में पीछे हटता रहा है। पूर्व में नगर निगम अधिकारियों के कई बार के अनुरोध के बाद भी तहसील राजस्व अधिकारियों व लेखपालों ने नगर निगम को कोई रास्ता नहीं दिया है। भेल संपदा विभाग ने भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ कोतवाली रानीपुर में नामजद मुकदमा भी दर्ज कराया था। अब एक बार फिर जिलाधिकारी ने प्रकरण को कुरेदा है। इससे उम्मीद जगी है कि कई हस्तियां बेपर्दा होंगी।