अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
नगर निगम प्रशासन ने बोर्ड को हवा भी नहीं लगने दी और शासन से वर्तमान बोर्ड को मिली एक करोड़ 10 लाख रुपये की अंतिम अनुदान राशि को ठिकाने लगा दिया।
नगर निगम ने सितंबर में प्राप्त 14वें वित्त आयोग की ग्रांट में से लगभग 66 लाख रुपये खर्च कर लिए हैं। इनमें 36 लाख रुपये को भुगतान कूड़ा उठाने वाली कंपनी केआरएल को दिए गए हैं और 30 लाख रुपये से सड़क व गलियों के विकास कार्य पर खर्च किए जा रहे हैं। इस बार पथ-प्रकाश पर कोई खर्चा नहीं किया जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि बची हुई धनराशि भी केआरएल की देने की तैयारी है। कंपनी का दो महीने का कूड़ा उठाने का पैसा अभी नगर निगम पर बकाया बताया जाता है। मेयर मनोज गर्ग ने बताया कि 14वें वित्त आयोग की ग्रांट का उपयोग दिसंबर तक कर शासन को उपयोगिता-प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होता है। यदि इसके लिए बोर्ड बैठक बुलाने के चक्कर में पड़ते तो फिर धनराशि खर्च करने का समय नहीं बचता। उन्होंने बताया कि अधिकतर पार्षदों से इसकी चर्चा कर ली गई थी और उनकी सहमति थी कि बोर्ड की स्वीकृति की प्रत्याशा में जनहित में धनराशि का उपयोग कर लिया जाए। नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष उपेंद्र कुमार ने कहा कि बोर्ड को किनारे कर 14वें वित्त आयोग की धनराशि को खर्च करने का कड़ा विरोध किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा पार्षदों के वार्ड में ही धनराशि को खर्च किया जा रहा है। उन्होंने केआरएल को भुगतान करने में दिखाई जा रही तत्परता पर भी सवाल उठाया है।