राजधानी में 150 अस्पतालों और क्लीनिकों का पंजीकरण एक साल पहले खत्म हो चुका है। ये अस्पताल और क्लीनिक पंजीकरण का नवीनीकरण कराने में दिलचस्पी भी नहीं दिखा रहे, लेकिन स्वास्थ्य विभाग इन पर कार्रवाई करना तो दूर एक नोटिस तक जारी नहीं कर रहा है। खास बात यह है कि बिना पंजीकरण चल रहे इन अस्पतालों में सरकारी अस्पताल भी शामिल हैं।
दरअसल देहरादून जिले में कुल 1238 अस्पताल हैं। इनमें 205 सरकारी और 1033 निजी अस्पताल हैं। स्वास्थ्य विभाग ने पिछले साल 427 अस्पतालों और क्लीनिकों को पंजीकरण का नवीनीकरण न कराने पर नोटिस जारी किया था। इसके बाद 150 अस्पतालों ने अस्पताल बंद होने की सूचना दी थी, जबकि 200 ने पंजीकरण करवा लिया था। शेष अस्पताल बिना नवीनीकरण ही चल रहे हैं। सरकारी और निजी मिलाकर ऐसे लगभग 150 अस्पताल और क्लीनिक हैं।
एसीएमओ डॉ. दिनेश चौहान ने बताया कि हमने पिछले साल अस्पतालों को नवीनीकरण के लिए नोटिस भेजा था, लेकिन कोरोना काल में कई अस्पताल बंद हो गए थे। इसके अलावा क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट को लेकर भी आईएमए ने कुछ मानक तय किए हैं, लेकिन सरकार ने इस पर अभी मुहर नहीं लगाई है। इसलिए हम भी नवीनीकरण पर जोर नहीं दे रहे हैं।
यह है नियम
डॉ. दिनेश ने बताया कि क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत जो अस्पताल और क्लीनिक नवीनीकरण नहीं करवाते उन पर रोजाना 100 रुपये जुर्माना लगाया जाता है। इसके अलावा नवीनीकरण कराते समय विलंब शुल्क भी लगाया जाता है। वहीं क्लीनिक का रजिस्ट्रेशन न करवाने पर पहली बार में 50 हजार की पेनाल्टी, दूसरी बार में दो लाख और तीसरी बार में पांच लाख रुपये जुर्माना लगाया जाता है। 2016 से लेकर अब तक इस तरह के मामलों से स्वास्थ्य विभाग जुर्माने के तौर पर साढ़े तीन करोड़ रुपये वसूल चुका है।
क्या है यह एक्ट
इस एक्ट के तहत सरकारी व निजी क्लीनिक, अस्पताल, आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथ, नर्सिंग होम आदि का रजिस्ट्रेशन होता है। रजिस्ट्रेशन होने पर चिकित्सा उपचार संबंधी हर सेवा का शुल्क भी अस्पतालों की श्रेणीवार निर्धारित हो जाता है। प्राइवेट अस्पतालों को अपने डॉक्टर व अन्य पैरामेडिकल स्टाफ की योग्यता के प्रमाण भी उपलब्ध कराने होते हैं।