नालों की सफाई के लिए जिलाधिकारी भले ही सख्त रवैया अपना रहे हों, लेकिन पछवादून में राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारों पर बने नालों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। हाईवे के नालों की बनने के बाद से एक बार भी सफाई नहीं की गई। उनमें कचरा मिट्टी भरने से जगह-जगह चोक होता है। अब सवाल यह है कि पछवादून के इन नालों की सुध कौन लेगा। पछवादून में 2010 में भारी वर्षा के बाद उत्पन्न हुई समस्या को देखते हुए दिल्ली-यमुनोत्री व देहरादून पांवटा राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे नालों का निर्माण कराया गया था। लेकिन, उसे स्लैब आदि से ढका नहीं गया। समय के साथ नालों में मिट्टी व कचरा आदि जमा होता रहा। करीब 13 वर्ष बीतने को है, अभी तक एक बार भी नालों की सफाई नहीं की गई। ह्यूमन राइट एंड आरटीआई एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविंद शर्मा, पछवादून विकास मंच के संयोजक अतुल शर्मा का कहना है कि बरसात में राष्ट्रीय राजमार्ग व इससे सटे आबादी क्षेत्रों में जलभराव की समस्या दिन प्रतिदिन गंभीर हो रही है। हाईवे के नालों को जलभराव की समस्या के समाधान के लिए उपयोग किया जा सकता है, लेकिन नालों पर खर्च किए गए करोड़ों रुपये बेकार हो रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से पछवादून के नालों की स्थिति को सुधारने की मांग की है।