ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
मनुष्य को ज्ञान के बिना मुक्तिनहीं मिलती। अपनी बुराइयां सुनकर मन को स्थिर रखने वाला व्यक्ति जीवन पथ पर आगे बढ़ता है।
यह बातें बंजारावाला स्थित एक वेडिंग प्वांइट में आयोजित श्रीमद्भागवत के छठे दिन आचार्य शिवप्रसाद ममगाईं ने कहीं। उन्होंने कहा कि मनुष्य के जीवन में जो भी कष्ट आते हैं वे पूर्व में किए गए बुरे कर्मों का फल है। जो कुछ भी मिलता है वह कर्मों से ही प्राप्त होता है। भगवान श्रीकृष्ण ने भी कर्म को ही महत्ता दी है। जब तक सत्संग के माध्यम से नाम संकीर्तन कथा का महत्व नहीं समझा जाएगा। तब तक संकीर्तन में मन कैसे लगेगा। मन के भटकने का मतलब आस्था की कमी है। कार्यक्रम में नागेंद्र असवाल, शीशपाल असवाल, अमर सिंह असवाल, प्रभुदयाल असवाल, देवेश्वरी असवाल, सारांश, अनन्या, रश्मि, विमला देवी, हंसराज चौहान, जगदीश नौटियाल, जगदीश ममगाईं, महेश भट्ट, डॉ. संदीप बहुगुणा, द्वारिका नौटियाल आदि शामिल रहे।