जनपद में फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनाकर बेचने और इन पर शस्त्र खरीदे जाने का बड़ा खेल पकड़ा गया है। बावन के चौकी प्रभारी ने इस खेल का खुलासा किया है। पुलिस ने फिलहाल दो लोगों को दोनाली बंदूक और चार कारतूसों के साथ गिरफ्तार किया है। दोनों बंदूकें नागालैंड के बने लाइसेंस पर खरीदी गई थीं। लेकिन नवीनीकरण न हो पाने के कारण बिना लाइसेंस के बंदूक समेत दो लोग पकड़ लिए गए। इस मामले में अब पुलिस पचदेवरा थाना क्षेत्र के ग्राम पतौरा निवासी एक व्यक्ति की तलाश में है।
रविवार रात बावन के चौकी प्रभारी वीरेंद्र सिंह तोमर, सिपाही सुभाषचंद्र, धर्मेद्र और कमल यादव के साथ गश्त कर रहे थे। बैजना मोड़ के निकट दोनाली बंदूक लेेकर जा रहे लोनार थाना क्षेत्र के ग्राम बैजना निवासी महेश यादव पुत्र होरी और ओहदपुर निवासी राजकुमार पुत्र सुंदरलाल को चौकी प्रभारी ने रोक लिया। दोनों से शस्त्रों के लाइसेंस मांगे गए तो वह नहीं दिखा पाए।
इन लोगों ने पुलिस को बताया कि लाइसेेंस नवीनीकरण के लिए दिए गए हैं। इस पर चौकी प्रभारी ने महेश और राजकुमार को हिरासत में ले लिया। पूछताछ के दौरान पता चला कि दोनों के लाइसेंस पचदेवरा थाना क्षेत्र के ग्राम पतौरा निवासी एक व्यक्ति ने बनवाए थे। ये लाइसेंस नागालैंड के बने थे और हरदोई की ही एक शस्त्र की दुकान से खरीदे गए थे। जांच में ये स्पष्ट हो गया कि दोनों शस्त्र तो असली और कंपनी के हैं, लेकिन लाइसेंस फर्जी है।
पकड़े गए दोनों लोगों को भी कुछ दिन पहले ही ये पता चला कि उनके पास जो शस्त्र लाइसेंस हैं वह फर्जी हैं। दोनों ने पुलिस को बताया कि पचदेवरा थाना क्षेत्र के ग्राम पतौरा निवासी एक व्यक्ति ने उनके शस्त्र लाइसेंस बनवाए थे। शस्त्र लाइसेंस का नवीनीकरण न होने पर जब उन्होंने शिकायत दर्ज कराई तो संबंधित व्यक्ति ने लाइसेंस का नवीनीकरण खुद कराने की बात कहकर लाइसेंस ले लिए। चौकी प्रभारी वीरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि फर्जी लाइसेंस पर शस्त्र खरीदे जाने का मामला है। एसपी के संज्ञान में पूरी बात ला दी गई है। पकड़े गए दोनों लोगों को जेल भेजा गया है।
जांच हो तो निकलेंगे और भी फर्जी लाइसेंस
शस्त्र लाइसेंसों को लेकर जनपद में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा है। पचदेवरा, पाली और शाहाबाद थाना क्षेत्र के अलावा हरपालपुर थाना क्षेत्र में भी कुछ लोग सक्रिय हैं। ये लोग शस्त्र लाइसेंस की इच्छा रखने वाले लोगों से वसूली कर लेते हैं। इसके बाद यूपी में कोर्ट के निर्देश पर पाबंदी लगी होने की बात कहकर नागालैंड या कश्मीर से लाइसेंस बनवाकर देने की बात कहते हैं। इसके एवज में 20 हजार रुपये से एक लाख रुपये तक की वसूली की जाती है। साथ ही यह भी भरोसा दिलाया जाता है कि गैर प्रांत की लाइसेंस जनपद में ट्रांसफर करा दी जाएगी। जब नवीनीकरण की बारी आती है तो फर्जीवाड़े की पोल खुल जाती है। क्योंकि उक्त लाइसेंस शस्त्र कार्यालय में पंजीकृत ही नहीं होता है।