रिमझिम बारिश में शुक्रवार की रात कोठरी ढहने से मजदूर की मलबे में दबकर मौत हो गई। नाराज ग्रामीणों ने शव को बीच गांव में रखकर हंगामा कर दिया। सूचना पर एसडीएम पहुंचे। ग्रामीणों ने हादसे के लिए प्रधान को जिम्मेदार ठहराया। आरोप लगाया कि मृतक को आवास योजना का लाभ मिला होता तो हादसा न होता। एसडीएम ने मामले की जांच के आदेश देकर मृतक आश्रित परिवार को आवास योजना का लाभ दिलाने की बात कही है।
कल्यानपुर थाना क्षेत्र के दलबलाखेड़ा गांव निवासी आशादीन के तीन बेटों में बड़ा राम प्रताप कश्यप (50) मजदूरी करता था। छोटे भाई जगदीश अहमदाबाद और सहदेव मुंबई में प्राइवेट नौकरी करते हैं। अविवाहित राम प्रताप गांव में पिता के साथ कच्ची कोठरी में रहता था। रात करीब 12 बजे कोठरी अचानक भरभरा कर ढह गई। हादसे में रामप्रताप मलबे में दब गया। कुछ दूरी पर सो रहा पिता आशादीन बाल-बाल बचे। किसी तरह बाहर निकले। चीख पुकार पर ग्रामीण इकट्ठा हो गए। मलबे को हटाकर रामप्रताप को बाहर निकाला गया। सांसें थम चुकी थीं। ग्रामीणों ने शव दोपहर को गांव में रखकर प्रधान व उनके पति वीपी सिंह के खिलाफ प्रदर्शन किया। पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस को शव उठाने से रोक दिया। बिंदकी एसडीएम मौके पर पहुंचे। ग्रामीण रूप नारायण सिंह, रामेश्वर सिंह, पुतान सिंह, रामशरण सिंह, प्रेम सिंह ने एसडीएम को बताया कि गांव में विकास नहीं हुआ है। कई बार मृतक रामप्रताप के परिवार के लिए कालोनी दिलाने प्रधानपति से मांग की गई थी। आवास दिलाने के बदले रुपयों की मांग की थी। इसी वजह से बारिश में मजदूर का घर ढहा है। गांव में शौचालयों का निर्माण नहीं है। रूप नारायण सिंह की ओर से गांव में अनियमितताओं को लेकर डीएम से एक माह पहले शिकायत की गई थी। एसडीएम ने गांव का निरीक्षण किया। ग्रामीणों को समझा बुझाकर शांत किया। पीड़ित परिवार को मंगलवार आवास योजना का लाभ दिलाने और अनियमितताओं की जांच आश्वासन दिया। करीब तीन घंटे बाद पुलिस शव को कब्जे में ले सकी। थानेदार अरविंद सिंह ने बताया शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।