रेलवे में टीटीई की नौकरी दिलाने के नाम पर 30 बेरोजगार युवकों को अपना शिकार बनाकर 1.30 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले गिरोह के सरगना को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उसके पास से गोरखपुर व इलाहाबाद डीआरएम द्वारा जारी फर्जी नियुक्ति पत्र भी बरामद किए गए। ठगी के इस रैकेट में रेलवे के गोरखपुर व इलाहाबाद मंडल के कुछ कर्मचारियों के शामिल होने का संदेह है। ठगों ने रेलवे बोर्ड की फर्जी वेबसाइट बनाई हुई थी, जिसमें अभ्यर्थी का नाम और पता दिखाते हुए अपने शिकार को विश्वास में लेता था।
अपर पुलिस अधीक्षक केशव चद्र गोस्वामी ने मंगलवार को बताया कि पुलिस ने शरद सक्सेना निवासी आनंदीदासपुर, कन्नौज को सरायमीरा बस स्टाप के पास से गिरफ्तार किया। जबकि गिरोह के तीन सदस्य अधिवक्ता मधुकर सक्सेना और अंशुमान यादव उर्फ मुलायम सिंह निवासी आंखीपुर, आजमगढ़ और एक अज्ञात सत्यम फरार हो गए। सर्विलांस टीम प्रभारी कुलदीप दीक्षित और एसएसआई राजकुमार सिंह ने इनको गिरफ्तार किया।
उन्होंने बताया कि इंदरगढ़ थानाक्षेत्र के गांव मंसुखपुर्वा निवासी अजय प्रताप ने आरोपियों पर नौकरी के नाम पर 70 लाख और कानपुर देहात के तिस्ती थानाक्षेत्र के गांव कोडरा निवासी अवधेश कुमार ने 45 लाख रुपये की ठगी का मुकदमा करीब तीन माह पहले दर्ज कराया था। उसके बाद से ही पुलिस इनकी तलाश कर रही थी। आरोपी के पास से इलाहाबाद व गोरखपुर डीआरएम के हस्ताक्षर व मोहर लगे फर्जी नियुक्ति पत्र भी बरामद हुए है। एएसपी ने बताया कि इस नेटवर्क में रेलवे कर्मचारियों की संलिप्त हो सकते है। इसकी पड़ताल की जा रही है।
बाकी बचे तीन आरोपियों को भी जल्द गिरफ्तार किए जाने का उन्होंने दावा किया। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने रेलवे बोर्ड की फर्जी वेबसाइट बनाने और उसमें फर्जी आवेदकों के नाम दर्ज करने की बात भी कबूली। आरोपी शरद सक्सेना ने पुलिस पूछताछ में अधिवक्ता पिता और साथियों के साथ कन्नौज, कानपुर देहात, औरैया और आजमगढ़ समेत कई जनपदों के 30 बेरोजगारों से 1.30 करोड़ रुपये की ठगी किए जाने की बात कबूली है।
गोरखपुर व इलाहाबाद में फर्जी प्रशिक्षण
रेलवे में टीटीई की नौकरी लगवाने के नाम पर गिरोह प्रत्येक अभ्यार्थी से सात से आठ लाख रुपये लेते था । आवेदन के बाद प्रशिक्षण के लिए गोरखपुर और इलाहाबाद रेलवे मुख्यालय अभ्यार्थी को बुलाया जाता था। यहां एक निजी स्थान पर 15 दिन की ट्रेनिंग देने के बाद रेलवे बोर्ड की फर्जी वेबसाइट पर नाम-पता दिखाकर विश्वास जीता जाता था। उसके बाद फर्जी ज्वाइनिंग लेटर प्रदान करता था। आवेदकों को तीन माह बाद अलग-अलग रेलवे स्टेशनों में ज्वाइन करने को कहा जाता था।
शहरों में एजेंट बनाकर बेरोजगारों से ठगी
पुलिस की गिरफ्त में आया सरगना शरद सक्सेना बेहद शातिर है। मंहगी गाड़ियों से घूमने के साथ ही गोरखपुर के महंगे होटलों में एजेंटों को बुलाकर शिकार फंसाता था। रेलवे की कोचिंग करने वाले युवा उसका शिकार होते थे।