झांसी। बुधवार को जिला पूर्ति कार्यालय में तैनात लिपिक ओमप्रकाश गुप्ता को भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम ने पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। लिपिक के खिलाफ यह कार्रवाई एक कोटेदार की शिकायत पर की गई। लिपिक ने निलंबित दुकान की बहाली के लिए कोटेदार से घूस मांगी थी।
मऊरानीपुर के ग्राम वीरा में जयराम की पत्नी कुंवर बाई की सरकारी राशन की दुकान है। अनियमितताओं के चलते पिछले दिनों उप जिलाधिकारी ने दुकान निलंबित कर दी थी। इसकी फाइल जिला पूर्ति कार्यालय में थी। कोटेदार का पति दुकान की बहाली के लिए लगातार कार्यालय के चक्कर काट रहा था। लिपिक ओमप्रकाश गुप्ता द्वारा उससे फाइल आगे बढ़ाने के लिए पांच हजार रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी। न देने पर फाइल को लटका दिया गया था। पीड़ित ने इसकी शिकायत भ्रष्टाचार निवारण संगठन से की। इसके बाद विभाग ने लिपिक की घेराबंदी शुरू कर दी। कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी से अनुमति ली गई और पूरा प्लान तैयार कर लिया गया। जिलाधिकारी की ओर से टीम को दो सरकारी गवाह उपलब्ध कराए गए। बुधवार की दोपहर कोटेदार का पति आपूर्ति कार्यालय पहुंचा और उसने लिपिक को पांच हजार रुपये की रिश्वत दी। इसी दौरान वहां पहले से मौजूद एंटी करप्शन ब्यूरो प्रभारी अमरीश यादव के नेतृत्व में आई टीम ने लिपिक को रंगे हाथों पकड़ लिया। कार्यालय से टीम उसे सीपरी बाजार थाने ले आई और उसे पुलिस के हवाले कर दिया।
पहले भी पकड़ा जा चुका है
जिला पूर्ति कार्यालय से पहले भी एक लिपिक को रंगे हाथों रिश्वत लेते गिरफ्तार किया जा चुका है। लिपिक जितेंद्र सिंह सेंगर को कार्यालय से टीम ने गिरफ्तार कर पुलिस के हवाले कर दिया था। उल्लेखनीय है कि आपूर्ति कार्यालय में कर्मचारियों द्वारा रिश्वत मांगे जाने के मामले आए दिन सामने आते रहते हैं। लेकिन, लोग भ्रष्टाचार निवारण संगठन में शिकायत दर्ज नहीं कराते, जिससे जनता से सीधे तौर पर जुड़े इस महकमे में भ्रष्टाचार खूब पनप रहा है।