Relatives were turned away, she said father lit
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
22 साल की प्रियंका ने बेटे की अहमियत बताने वाली सामाजिक रीतियों को किनारे करते हुए अपने पिता को मुखाग्नि दी। रविवार रात हार्ट अटैक के बाद पिता की मौत के बाद उसने बड़ी बहन और अन्य रिश्तेदारों को फोन करके सूचना दी। बरेली में रह रही बहन पति के साथ पहुंच गईं पर दूसरे रिश्तेदार नहीं आए। सोमवार को घंटों रिश्तेदारों का इंतजार हुआ। इसके बाद गांव वालों के सहयोग से उसने पिता की अर्थी को न सिर्फ कंधा दिया बल्कि मुखाग्नि भी दी।
गुरसौली गांव में अशोक कुमार सक्सेना ने दोनों बेटियों के लालन पालन में पूरा जीवन लगा दिया। दोनों बेटियां जब नासमझ थीं पत्नी साथ छोड़ गईं। पत्नी के देहांत के बाद भी परिवार वालों ने दूसरी शादी का दबाव बनाया मगर उन्होंने इनकार कर दिया। अशोक बीस साल पहले गुरसौली में आकर बाबू राम के मकान में बेटियों के साथ रहने लगे थे। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार जब अशोक से कोई बेटा न होने की बात की जाती तो वह कहते कि उन्हें बेटियों पर नाज है। बेटियां बेटे से भी बढ़कर हैं। बड़ी बेटी की शादी उन्होंने बरेली की थी। छोटी बेटी प्रियंका ने एमजीएम इंटर कालेज से इंटर तक पढ़ाई की। इस समय एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ा रही है। पिता की मौत से दुखी प्रियंका रोते हुए कहती रही। कि पापा के कारण ही वह अपने पैरों पर खड़ी हो सकी। उन्होंने उसे हमेशा बेटा ही माना। पिता को बीमारियों ने घेरा तो घर चलाने के लिए उन्होंने पढ़ाना शुरू कर दिया।