बांदा। मुठभेड़ से देर रात लौटते समय फतेहगंज थाना क्षेत्र के बघोलन तिराहे पर तत्कालीन दस्यु सरगना ठोकिया द्वारा घात लगाकर आधा दर्जन एसटीएफ जवानों और उनके साथ एक मुखबिर पर गोलियां बरसाकर सामूहिक हत्या करने के केस को अब नौ वर्षों बाद चित्रकूट से बांदा की अदालत को सौंपा जा रहा है। एक आरोपी की रिट याचिका पर यह आदेश इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिया है। केस की फाइलें एक माह के अंदर बांदा की अदालतों को भेज दी जाएंगी। हाईकोर्ट ने इस मामले का आठ माह के अंदर फैसला सुनाने का भी आदेश दिया है।
22 जुलाई 2007 को जंगल में डकैतों से मुठभेड़ के बाद रात करीब 11 बजे अपने वाहन से लौट रहे एसटीएफ जवानों पर ठोकिया गिरोह ने अंधाधुंध गोलियां बरसा दी थीं। आधुनिक असलहों से लैस होने के बावजूद एसटीएफ जवानों को अपने बचाव का कोई मौका नहीं मिला और वह सब वाहन के अंदर ही मारे गए। प्रदेश की पुलिस को चुनौती देने वाली इस घटना का केस चित्रकूट की अदालत में पिछले करीब नौ वर्षों से चल रहा है। घटना के कई आरोपी बांदा जेल में हैं। एक आरोपी किशोरीलाल ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में हाल ही में रिट दायर करके कहा था कि उन्हें ट्रायल पर बांदा जेल से चित्रकूट की अदालत में पुलिस अभिरक्षा में ले जाया जाता है। पुलिस और अभियोजन इस केस के गवाहों को अभी तक न्यायालय में पेश नहीं कर सके हैं जिससे निस्तारण में विलंब हो रहा है।
किशोरीलाल की इस रिट में इलाहाबाद हाईकोर्ट में फौजदारी के अधिवक्ता कामेश्वर सिंह ने पैरवी की। इस रिट पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विजय लक्ष्मी ने हाल ही में दिए अपने आदेश में अभियोजन के कामों पर असंतोष जताते हुए कहा कि वह अभी तक चित्रकूट न्यायालय में अभिलेखों की मूल प्रतियों की प्रमाणित प्रतिलिपि दाखिल नहीं कर सके हैं जिससे वर्ष 2007 से यह मामला अनावश्यक रूप से विचाराधीन है। जबकि इस मामले के कुछ आरोपी चित्रकूट की अदालत से दूसरे मामलों में सजा पा चुके हैं। न्यायाधीश ने आदेश दिया है कि निर्धारित समय सीमा के अंदर इस मामले का निस्तारण किया जाए। एक माह के अंदर फाइलें चित्रकूट से बांदा की अदालत भेज दी जाएं।