करीब 19 वर्ष पूर्व हत्या के एक मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आरोपी भाई के विरुद्ध दोष साबित पाकर उसे आजीवन कारावास तथा 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया। इस मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अश्विनी कुमार सिंह की अदालत में हुई।
अभियोजन के अनुसार बैरिया गांव निवासी भीम नट ने बैरिया थाने में आठ अगस्त 1997 को अपने सगे चाचा लालबाबू नट और बलिराम नट के विरुद्ध बैरिया थाने में तहरीर दी। जिसमें बताया कि दोनों आठ अगस्त की रात करीब नौ बजे बैरिया बाजार से शराब पीकर घर आए और आपस में कहासुनी करने लगे।
इस दौरान लाल बाबू ने अपने भाई बलिराम को चाकू से मार दिया। इसके बाद बड़े भाई पंचा ने लालबाबू को यह कहते हुए समझाया कि तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था। इस बात पर नाराज होकर अभियुक्त लालबाबू ने अपने भाई पंचा के सिर पर धारदार हथियार से प्रहार कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
इस मामले में आरोप पत्र प्रेषित होने के बाद कोर्ट ने सुनवाई करते हुए आरोपी लालबाबू नट को आजीवन कारावास व 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से एडीजीसी हर्ष नारायण तथा बचाव पक्ष से डा. बीके सिंह ने पैरवी की।