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52 किलो गांजे के साथ चार तस्कर गिरफ्तार

Tue, 09 Jan 2018 11:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/फतेहपुर
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गांजा तस्करी के आरोपी। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कल्यानपुर थाना क्षेत्र पर सोमवार की रात 52 किलो गांजे के साथ चार तस्करों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों में एक उन्नाव जिले का ढाबा संचालक और दूसरा उसका ड्राइवर है। ये दो गाड़ियों से गांजा लेकर झारखंड से उन्नाव जा रहे थे। इसकी कीमत करीब पांच से छह लाख रुपये के बीच आंकी जा रही है।
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पुलिस लाइन में अपर पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार ने बताया कि असोथर थाने के सिपाही शहनवाज हुसैन और गाजीपुर थाने के सिपाही उमेश कुमार सिंह ने कल्यानपुर एसओ अरविंद सिंह गौर को दो गाड़ियों में मादक पदार्थ होने की सूचना दी। पुलिस ने कानपुर की ओर जा रही संदिग्ध टाटा सूमो को रोकने का इशारा किया। सूमो चालक ने वाहन को पीछे मोड़ना चाहा। ठीक उसके पीछे आ रही डस्टर भी मुड़ने लगी। इस पर दोनों वाहनों को पीछा कर पकड़ा लिया। टाटा सूमो से 27 किलो 500 ग्राम और डस्टर से 24 किलो 500 ग्राम गांजा बरामद हुआ।

सूमो में झारखंड प्रांत के बोकारो थाना के हरला खटाल ए सेक्टर निवासी चालक प्रदीप कुमार यादव और उसके साथी बिहार प्रांत के छपरा जिले में मांझी थाने के डुबरी गांव निवासी संदीप कुमार को पकड़ा गया। वहीं, डस्टर से उन्नाव जिले के कोतवाली अंतर्गत अकरमपुर निवासी अशोक कुमार त्रिपाठी और इसी पते के चालक राजू सोनी को गिरफ्तार किया गया।
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एएसपी ने बताया कि आरोपी गांजे की खेप को बोकारो से लेकर उन्नाव जा रहे थे। डस्टर मालिक अशोक त्रिपाठी का अकरमपुर हाईवे पर ढाबा है। वहीं, सारा माल उतरना था। टीम को पांच हजार रुपये का पुरस्कार दिया गया है।

पुलिस ने ढाबा संचालक को बहाने से बुलाया
पुलिस सूत्रों के मुताबिक टाटा सूमो का पीछा असोथर पुलिस कर रही थी। सूमो सवारों को कल्यानपुर पुलिस की मदद से पकड़ा गया। सूमो सवारों से पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो उन्नाव के आरोपियों का सुराग लगा। पुलिस ने सूमो सवार तस्करों से ढाबा संचालक को गाड़ी खराब होने की कॉल कराई। पहुंचते ही पुलिस ने दबोच लिया। पुलिस के मुताबिक उन्नाव जिले में त्रिपाठी ढाबा संचालित होता है। ढाबे में नशे का कारोबार होने की काफी दिनों से चर्चा रही है।

गांजा रखने के लिए सूमो में नई छत बनाई
पुलिस को सटीक सूचना नहीं होती तो शायद तस्कर हत्थे चढ़ने से बच जाते। सूमो की छत के नीचे लोहे की पूरी नई छत बना रखी थी। उसमें एक जगह बीच में खिड़की बनी थी। उसके बाद आम गाड़ियों की तरह छत कवर लगाया गया। इसे देखकर गांजा छिपाने की जगह का अंदाजा लगाना भी मुश्किल था।
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