बेटे के कातिल जेल गए तो शुभम के पिता की आंखों में जहां तसल्ली की चमक बढ़ी, वहीं इकलौते बेटे का गंवाने का गम भी छलक पड़ा। नावनजोत गांव निवासी राम सिधारे के छह वर्षीय इकलौते बेटे शुभम की लाश जब 17 अप्रैल को गांव के निवासी किशुनदेव के मकान के पास पुआल और उपले के ढेर के नीचे मिली थी, तभी उसने पड़ोस की निर्मला और छपरा मगर्वी गांव के बबलू उर्फ रामाकांत पर हत्या का आरोप मढ़ा था। बाद में दोनों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कराया था।
पुलिस ने पहले जब नामजद दोनों आरोपियों को पकड़ कर पूछताछ करने के बाद छोड़ दिया था तो पीड़ित पिता को गहरा धक्का लगा था। मामले के पर्दाफाश की मांग को लेकर गांव वालों का आक्रोश भी भड़का था और थाने का घेराव से लेकर रास्ता जाम तक की नौबत आई थी। इधर घटना के 23 दिन बाद जब पुलिस ने आरोपी निर्मला और बबलू को गिरफ्तार कर हत्याकांड का पर्दाफाश किया तो शुभम के घरवालों को सुकून मिला। रामसिधारे ने बताया कि उसे यह उम्मीद नहीं थी कि बबलू और निर्मला की मनमानी करतूतों के विरोध की कीमत बेटे की जान से चुकानी होगी। यह कहते हुए रामसिधारे की आंखें छलक आईं।
इधर, निर्मला के ससुर राममूरत ने पुलिस को बताया कि उसका बेटा रामप्रीत रोजगार के सिलसिले में पंजाब रहता है, जबकि बहू निर्मला घर पर रहती थी। बहू के मायके छपरा मगर्वी का रहने वाला आरोपी बबलू उर्फ रामाकांत उसके घर पर अक्सर आता-जाता था। दोनों की हरकतों से वह पहले ही आजिज आ चुके थे, लेकिन दोनों मिलकर मासूम शुभम की सांसे छीन लेेंगे, इसकी उम्मीद नहीं थी।