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डॉक्टर व स्टाफ नर्स के खिलाफ मामला दर्ज

Wed, 10 Oct 2018 12:03 AM IST
अमर उजाला, इटावा
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fir shimla
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महेवा सरकारी अस्पताल से बिना रेफर प्रसूता को भगाने व स्टाफ  नर्स  की लापरवाही से नवजात शिशु की मौत होने के मामले में पीड़ित व्यक्ति ने डेढ़ साल बाद न्यायालय के माध्यम से अस्पताल के एक डॉक्टर व स्टाफ  नर्स के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।
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इकनौर गांव निवासी नीरज पुत्र रामबिहारी ने न्यायालय को दिए प्रार्थना पत्र में कहा कि 19 अप्रैल 2017 में उसकी पत्नी नीलम की डिलिवरी होनी थी। इसके चलते परिजन नीलम को महेवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर ले गए। जहां महेवा अस्पताल में तैनात डॉ. गौरव त्रिपाठी व स्टाफ  नर्स सुप्रिया के द्वारा नीलम के साथ लापरवाही तरीके से बर्ताव किया। नवजात शिशु की हालात व जच्चा की हालत बिगड़ने के कई घंटे बाद बाहर ले जाने की बात कही गई। यही नहीं इटावा रेफर किए जाने पर अस्पताल से एंबुलेंस भी नहीं भेजी गई। रास्ते मे हालात बिगड़ने पर लखना प्राथमिक अस्पताल की नर्स ने जच्चा की जान बचाई थी जबकि नवजात की मौत हो गई। नीरज ने कहा कि स्टाफ नर्स ने अस्पताल में दस्ताने न होने की बात कह कर दस्ताने भी लाने को बोला था। घटना के डेढ़ साल बाद न्यायालय के आदेश पर थाना पुलिस ने महेवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर गौरव त्रिपाठी व स्टाफ  नर्स सुप्रिया के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

 मामले की विवेचना महेवा चौकी इंचार्ज राकेश कुमार पटेल द्वारा की जा रही है। वहीं, महेवा अस्पताल में डिलेवरी विभाग में प्रसूता को रात दो बजे भर्ती दिखा 15 मिनट बाद ही प्रसूता के पति से जबरन ले जाना रजिस्टर में अपने बचाव में दर्ज किया जबकि महिला का पति दिल्ली में था। बकेवर के पास महिला को प्रसव हो गया, लेकिन बच्चा फं स गया। इससे प्रसूता की हालत बिगड़ने लगी। आनन-फानन में वैन से उसे लखना अस्पताल लेकर पहुंची। जहां लखना अस्पताल की एएनएम राजरानी ने तत्परता से प्रसूता को भर्ती कर फंसा हुआ बच्चा निकाला। लेकिन नवजात की मौत हो चुकी थी।
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