साल 2014 में आबकारी विभाग के एक अधिकारी ने करीब 2100 करोड़ टैक्स चोरी का खुलासा किया था। इसके बाद मामले में दो एफआईआर दर्ज की गईं। तब से मामले की जांच सीआईडी कर रही थी लेकिन बीच में दोनों ही मामलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
अब डीआईजी विनोद कुमार धवन को मामले की जांच सौंपी गई, जिसके बाद नए तथ्य सामने आए हैं। धवन ने बताया कि कंपनी ने करीब पांच करोड़ रुपये के बिजली बिल को इलेक्ट्रॉनिक तरीके से अदा किया लेकिन नेफ्ट भी बाउंस हो गया।
इस मामले में अगले हफ्ते तक सीआईडी चालान पेश कर देगी। वहीं, करीब 20 करोड़ की कीमत की जिस जमीन पर फैक्ट्री खड़ी की गई, उसे धारा 118 के तहत मंजूरी ही नहीं मिली। इसी वजह से कंपनी ने जमीन की रजिस्ट्री भी अपने नाम नहीं कराई और सरकार को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया है।
अब तक की जांच में विभागीय मिलीभगत की बात भी सामने आ रही है। जब प्रदेश भर में कराधान विभाग के नाके लगे हुए हैं और आने-जाने वाले माल की चेकिंग होती है तो माल आया और गया पर विभाग को पता नहीं चल पाया, यह असंभव है।
इस मामले की जांच चूंकि बीच में कुछ समय अन्य अधिकारियों के पास थी इसलिए इसमें देर हुई लेकिन अब जांच में कुछ नए तथ्य सामने आए हैं। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में इस मामले का चालान कोर्ट में पेश किया जाएगा।